पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय का यह पहला संरचित एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें 40 से अधिक विभागों के 50 संकाय सदस्य भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में एआई के बढ़ते महत्व को देखते हुए शिक्षकों को नई तकनीकों से दक्ष बनाना है।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में एआई-सक्षम शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दीर्घकालिक पहल का पहला चरण है। इसमें अधिष्ठाता, वरिष्ठ प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं। कुलपति प्रो. शिवेंद्र कश्यप के नेतृत्व में संकाय विकास केंद्र कार्यक्रम का संचालन कर रहा है जबकि सह-समन्वयक जेपी पुरवार शोध निदेशालय और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के सहयोग से इसका समन्वयन कर रहे हैं।
कुलपति प्रो. शिवेंद्र कश्यप ने कहा कि तेजी से बदल रही प्रौद्योगिकियों के दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का निरंतर कौशल विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग शिक्षण, शोध और प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दे सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय एआई को शिक्षण, शोध, प्रसार, नवाचार और प्रशासन में प्रभावी रूप से शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
प्रशिक्षण में एलएलएम, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और उत्तरदायी एआई पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा उत्तरदायी एआई, डेटा गोपनीयता, एआई-सहायित शिक्षण, शोध में एआई के अनुप्रयोग तथा एजेंटिक एआई जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। लाइव डेमो के माध्यम से यह भी बताया जा रहा है कि एआई शिक्षण, शोध और प्रशासनिक कार्यों को किस प्रकार अधिक प्रभावी बना सकता है।
उद्योग जगत के सहयोग से मिल रहा व्यावहारिक अनुभव
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग है। लूमिक के सह-संस्थापक एवं पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र वैभव डोबरियाल तकनीकी सत्रों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के ब्रेन-3 सम्मेलन के दौरान एआई-सक्षम शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का संकल्प लिया था। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उसी क्रम में आयोजित हो रहा है।