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फेज-2 में एयरपोर्ट विकसित करने के लिए 1520 एकड़ अतिरिक्त भूमि की होगी जरूरत

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पंतनगर। विवि की भूमि पर प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए करीब 920 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इसके अलावा बरेली-नैनीताल रोड से एप्रोच रोड के लिए 25 एकड़ और शहर की तरफ विस्तार के लिए करीब 70 और 55 एकड़ भूमि की जरूरत होगी। इस प्रकार एयरपोर्ट बनाने के लिए कुल 1070 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। यह भूमि राजस्व विभाग के पहले से निर्धारित भूमि के अंतर्गत आती है। इसके अलावा फेज-2 में 1520 एकड़ अतिरिक्त भूमि क्षेत्र यातायात की मांग के अनुसार दूसरे रन-वे के लिए भविष्य में अधिग्रहीत की जा सकती है। इसका खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में हुआ है।
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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की 1072 एकड़ उपजाऊ भूमि न्यू ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए उत्तराखंड के नागरिक उड्डयन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। इसको लेकर विवि प्रशासन, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों सहित तमाम संगठनों का विरोध भी हुआ। इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता केशव पासी ने आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि प्रस्तावित स्थल पश्चिम की ओर औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल से सटा हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र में अधिक ऊंचाई वाली कई चिमनियां हैं। प्रस्तावित भूमि के ऊपर से पावर एचटी लाइनें भी गुजर रही हैं। चिमनियों से निकलने वाले धुएं, स्मॉग, चिमनी ओर एचटी लाइन के कारण लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान विमान संचालन के लिए सुरक्षा खतरों को पैदा कर सकता है। इसमें हाईटेंशन की दो लाइनें पूरब, पश्चिम (बरेली-खटीमा) की ओर और दो लाइनें उत्तर, दक्षिण (नैनीताल से बरेली) की ओर जा रही हैं। ये सभी प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के टेकऑफ मार्ग में पड़ती हैं।
ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निरीक्षण करते समय प्रस्तावित भूमि के ऊपर, उत्तर से दक्षिण की ओर कई प्राकृतिक जल प्रवाहों को देखा गया है। इन प्राकृतिक प्रवाहों का प्रयोग विश्वविद्यालय की भूमि को सींचने में होता है। यह भी तथ्य सामने आए कि बारिश के समय प्रस्तावित भूमि के ऊपर से दो फीट ऊंचाई तक पानी बहता है। इसके लिए एयरपोर्ट निर्माण से पहले इन प्राकृतिक जल प्रवाहों का मार्ग बदलन पड़ेगा और जल निकासी का प्रबंधन भी जरूरी है। यह भी तथ्य सामने आया है कि प्रस्तावित भूमि के पूर्वी हिस्से में दो टेलीकॉम टावर भी लगे हैं। इसके दक्षिण छोर की 1520 एकड़ जमीन छोड़कर विश्वविद्यालय के बीचोंबीच में एयरपोर्ट बनेगा। दक्षिण की 1520 एकड़ भूमि फेज-2 के लिए बाद में ली जाएगी, जिससे विवि की कुल 2592 एकड़ भूमि एयरपोर्ट के लिए चली जाएगी। हाईटेंशन लाइनों को प्रस्तावित स्थल से 1.5 किमी दूर भी हटाना पड़ेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मांगी की गई सूचना में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रस्तावित स्थान मौजूदा हवाई अड्डे के बहुत ही करीब है। यहां पर एयरपोर्ट बनाने से पहले सरकार एवं संबंधित मंत्रालय को इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था।
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