रुद्रपुर/खटीमा। पंचायत जनाधिकार मंच उत्तराखंड के प्रदेश संयोजक जीत सिंह बिष्ट कहा कि 73वें संविधान संशोधन से पंचायतों को जो अधिकार मिले हैं राज्य सरकार उन्हें लागू नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पंचायतीराज अधिनियम-2016 की 23 धाराओं में संशोधन किया है। इसमें कई त्रुटियां हैं।
मंच की जिला इकाई की बैठक में बिष्ट ने कहा कि अधिनियम में किये गए दो संशोधनों से एक बड़ा वर्ग पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित हो सकता है। आरोप लगाया कि पंचायतों के खाते एक निजी बैंक में खुलवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पंचायतों के बजट में कटौती की जा रही है। पिछले पांच साल में प्रदेश की 500 पंचायतों का अस्तित्व समाप्त कर उनका विलय नगरीय क्षेत्र में कर दिया गया है।
मंच के मुख्य समन्वयक मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि हम भी जनसंख्या नियंत्रण के पक्षधर हैं। लेकिन इसका प्रयोग केवल पंचायतों पर नहीं करना चाहिए। पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ ने कहा विगत कांग्रेस की सरकार ने राज्य का जो पंचायत राज अधिनियम लागू किया, उसमे पंचायतों के अधिकार सुरक्षित थे। वहां पर दलजीत सिंह, प्रीत ग्रोवर, आनंद आर्य, सुभाष बेहड़, जगदीश तनेजा, संदीप चीमा,जगतार बाजवा, त्रिलोक मक्कड़, दिलबाग सिंह समेत 50 से अधिक जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी सदस्य, ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
इधर, खटीमा में मंच की खटीमा इकाई की बैठक में प्रदेश संयोजक ने कहा कि तीन बच्चे वालों को चुनाव से वंचित रखना लोकशाही के खिलाफ है। एक सभागार में किसान नेता प्रकाश तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओखलकांडा के ब्लॉक प्रमुख आनंद आर्य, दयाकिशन कलौनी, महेंद्र ठाकुर, ज्येष्ठ प्रमुख रेखा सोनकर, प्रधान संघ अध्यक्ष मोहनी पोखरिया, जसवंत बसेड़ा-बनबसा, राम पांडे, दिनेश राणा, उम्मेद सिंह मेहरा, चेतराम राणा, रमेश चंद्र जोशी रामू, मनमोहन सोहेल, बलवंत सिंह, मूलिया देवी, विमला मुंडेला, कुसुम कापड़ी, मलकीत सिंह आदि थे। संचालन सगीर अहमद ने किया।