खटीमा-सितारगंज क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए डाले जाने वाले टेंडर पालिकाध्यक्ष के विरोध करने पर स्थगित कर दिए गए। पालिकाध्यक्ष ने शहरी क्षेत्र में सात करोड़ से प्रस्तावित नाला निर्माण को स्वीकृति न मिलने पर आक्रोश जताया। कहा कि मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को नाला निर्माण के आदेश दिए थे। गुस्साए पालिकाध्यक्ष टेंडर बॉक्स पर ही धरने में बैठ गए।
ईई संजय राज ने बताया कि नाला निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसे स्वीकृति नहीं मिली है।
सोमवार को सिंचाई खंड कार्यालय में खटीमा, सितारगंज में होने वाले 3.5 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्यों का टेंडर होना था। पालिकाध्यक्ष कांता प्रसाद सागर ने मौके पर पहुंच टेंडर का विरोध जताया और टेंडर बॉक्स पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि तीन माह पूर्व चिंतीमजरा से पैरपुरा गांव तक पानी निकासी के लिए सात करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री हरीश रावत को दिया था।
सीएम ने सिंचाई विभाग को नाला निर्माण कराने के आदेश दिए थे। इस पर न तो निर्माण ही शुरू हुआ और न ही नाला निर्माण की धनराशि ही अवमुक्त हुई। इसको लेकर करीब दो घंटे तक टेंडर डालने आए ठेकेदारों में अफरा तफरी मची रही। सिंचाई विभाग के ईई संजय राज ने दोपहर एक बजे के बाद टेंडर स्थगित कर दिए।
उन्होंने बताया कि 30 नवंबर को दोबारा टेंडर डाले जाएंगे। बताया कि नगर पालिका परिषद की कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग नहीं है। इस कारण नाला निर्माण में दिक्कत आ रही है। बताया कि नाबार्ड में सात करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले नाला निर्माण का प्रस्ताव लंबित है। इसकी स्वीकृति के बाद धन आवंटित होते ही कार्य चालू कराया जाएगा। इस मौके पर पालिका सभासद जगदीश राणा, नेत्रपाल, मुख्त्यार अंसारी, सरताज अहमद, हसनैन मलिक, अख्त्यार अहमद पटौदी आदि थे।