प्रदेश की एकमात्र राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण प्रयोगशाला के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग मैसूर और चंडीगढ़ की लैबों पर निर्भर है। इससे महीनों पहले भेजे गए खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आ पाई है।
दावा किया जा रहा है कि खाली पदों को जल्द भर लिया जाएगा, लेकिन इसमें भी संशय बना हुआ है। शासन स्तर से लैब में खाद्य विश्लेषक के स्थायी पद पर एक साल पहले तैनाती के आदेश जारी किए गए थे, इसमें मैसूर से मनोरंजन कुमार को इस पद पर ज्वाइनिंग करनी थी, लेकिन आज तक उन्होंने ज्वाइनिंग नहीं ली है।
खाद्य एवं पेय पदार्थों की सैंपलिंग के लिए यहां राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण प्रयोगशाला की स्थापना की गई थी। लेकिन धरातल पर काम नहीं होने से राज्य की एकमात्र खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला दूसरे राज्यों की मोहताज हो गई। यहां पर न तो पर्याप्त स्टाफ ही मौजूद है और ना ही उतनी मशीनें जो नमूनों की बेहतर जांच कर सकें।
सूत्रों की मानें तो कई मशीनें खराब पड़ी हुई हैं लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने उन्हें दुरुस्त कराने की जहमत तक नहीं उठाई है। यहां पर न खाद्य विश्लेषक ही है न प्रयोगशाला सहायक। इस बारे में लैब प्रभारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एचके जोशी ने बताया कि खाद्य विश्लेषक की तैनाती के आदेश उनके पास हाल ही में आए हैं, इसमें मैसूर से मनोरंजन कुमार को लैब विश्लेषक के पद पर नियुक्त किया गया है। शासन स्तर पर तैनाती को लेकर पहले क्या कार्रवाई हुई थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। अन्य पदों पर भर्ती की क्या प्रक्रिया है, इस संबंध में वह चुप्पी साध गए।
अभी तक के सभी पद संविदा के ही भरे गए
रुद्रपुर। सूत्र बताते हैं कि राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण प्रयोगशाला में आज तक जितने भी पद भरे गए थे सभी संविदा से भरे गए थे, जिस वजह से कर्मचारियों ने धीरे-धीरे यहां से किनारा करना ही बेहतर समझा।
फूड एनालॉसिस्ट का कार्यकाल 30 को हो रहा पूरा
रुद्रपुर। आज हालत यह है कि लैब में एकमात्र फूड एनालॉसिस्ट का कार्यकाल भी 30 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। ऐसे में विभाग की आगे की गतिविधि किस तरह से संचालित होगी, यह सबसे बड़ी चुनौती है।