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नानकसागर में बचा सिर्फ तीन फीसदी पानी

Wed, 03 May 2017 12:23 AM IST
यासीन अंसारी/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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नानकसागर - फोटो : अमर उजाला
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नानकसागर जलाशय में सिर्फ तीन फीसदी पानी बचा है और जलाशय सूखने की कगार पर है। इसके चलते उत्तर प्रदेश के छह जिलों की करीब ढाई लाख हेक्टेयर खेती की सिंचाई का संकट आ खड़ा हुआ है। पानी की कमी के चलते 27 मार्च से बैराज से पानी निकासी बंद है। जलस्तर घटने का कारण सालभर में औसत से 42.72 फीसदी कम बारिश होना माना जा रहा है।
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वर्ष 1962 में बने नानकसागर जलाशय का वाटर लेवल समुद्र तल से 680 फीट ऊंचाई पर है। इसकी क्षमता 1.62 लाख एकड़ फीट पानी के स्टोरेज की है। नंधौर घाटी से निकली देवहा नदी, कामिनी नदी, निहाई नदी समेत बरुआ नाला, सूखा नाला इससे जुड़े हैं। इन नदी नालों से होकर पहाड़ का पानी जलाशय में आता है। इस जलाशय से यूपी के पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ तक करीब ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी की दिया जाता है। 

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बैराज से सालभर तक सिंचाई के लिए सप्लाई किए जाने वाले पानी का औसत लगभग आठ हजार क्यूसेक प्रति सप्ताह है लेकिन, वर्ष 2016-17 में एक जून से 1650 मिमी वर्षा के औसत के सापेक्ष सिर्फ 705 मिमी वर्षा ही हुई है। इसके चलते जलाशय में जलस्तर घट गया। 1.62 लाख एकड़ फीट पानी की क्षमता वाले जलाशय में सिर्फ पांच हजार एकड़ फीट पानी ही बचा है। इस कारण यूपी के सिंचाई विभाग ने 27 मार्च को नानकसागर बैराज से पानी निकासी बंद कर दी। इससे मई, जून में यूपी में ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर सिंचाई का संकट हो गया है।
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नानकसागर बैराज में पहाड़ का पानी आता है और फिर इस बैराज से दूनी डैम को पानी की आपूर्ति होती है। दूनी डैम से यूपी के जिलों में सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। पहाड़ों पर वर्षा होगी तो ही पानी की आपूर्ति की जा सकेगी। बैराज में पानी न होने की वजह से निकासी बंद की गई है।
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- आशीष रंजन, सहायक अभियंता, सिंचाई खंड, बरेली उत्तर प्रदेश।
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