रुद्रपुर। जिले में छोटे और मध्यम दुकानदारों के सामने कारोबार चलाना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। एक ओर लगातार बढ़ती महंगाई ने आम ग्राहकों की आवक घटा दी है वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन कारोबार से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा ने स्थानीय बाजारों की रौनक फीकी कर दी है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले एक-दो सालों में उनकी बिक्री में 20 से 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्य बाजार में किराना दुकान चलाने वाले रमेश अग्रवाल बताते हैं, पहले रोज का जो सामान लोग थोक में लेते थे, अब वही चीजें गिनकर ले रहे हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि ग्राहक जरूरत भर ही खरीद पा रहे हैं।
रेडीमेड कपड़ों की दुकान के संचालक इमरान खान कहते हैं कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। ऑनलाइन पर छूट और ऑफर देखकर ग्राहक दुकान तक आता ही नहीं। हम न तो इतना डिस्काउंट दे सकते हैं और न ही रिटर्न जैसी सुविधाएं।
इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बेचने वाले दुकानदारों की परेशानी भी कम नहीं है। विजय वर्मा का कहते हैं कि मोबाइल, टीवी या अन्य सामान देखने लोग दुकान पर आते हैं लेकिन खरीद ऑनलाइन कर लेते हैं। इससे हमारा खर्च निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
व्यापारियों के अनुसार, दुकान का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन और टैक्स लगातार बढ़ रहे हैं जबकि आमदनी घटती जा रही है। जीएसटी की जटिल प्रक्रिया छोटे दुकानदारों के लिए एक और सिरदर्द बनी हुई है। कई व्यापारियों का कहना है कि अकाउंटेंट का खर्च अलग से उठाना पड़ता है जो छोटे कारोबार के लिए भारी पड़ता है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय कहते हैं कि यदि समय रहते सरकार ने छोटे व्यापारियों के लिए राहत पैकेज, टैक्स में सरलता और ऑनलाइन कारोबार के लिए समान नियम लागू नहीं किए तो स्थानीय बाजारों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। छोटे दुकानदारों का यह संघर्ष सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि स्थानीय रोजगार और बाजार को बचाने की लड़ाई भी बनता जा रहा है।