रुद्रपुर। 15 से अधिक गांव के लोगों के लिए रेलवे का अंडर पास सपना बनकर रह गया है। बीते साल तीन बार अंडरपास का शिलान्यास किया गया था लेकिन करीब छह महीने बाद भी अंडर पास काम एक इंच आगे नहीं बढ़ा है। इससे अंडरपास को लेकर लोग में संशय बना है।
13 नवंबर 2024 को सांसद अजय भट्ट ने विधायक शिव अरोरा और अन्य नेताओं की मौजूदगी में समारोह पूर्वक रेलवे अंडरपास का शिलान्यास किया था। करीब चार करोड़ की लागत से बनने वाले अंडरपास की स्वीकृति को लेकर जमकर श्रेय लिया गया। जल्द अंडरपास का काम पूरा करने की बात कही गई थी। हाल यह है कि जो स्थिति शिलान्यास के दिन थी, वही स्थिति आज भी है। अंडरपास वाले स्थान पर बड़ा सा गड्ढा खोदा गया था। आज भी गड्ढा जस का तस है। अंडरपास का एक कॉलम तक खड़ा नहीं हो पाया है। गड्ढे से लगातार पानी आने को निर्माण कार्य में व्यवधान बताया जा रहा है।
जून में भी शुरू हुआ था निर्माण कार्य
इससे पहले भी भी दो बार अंडरपास का शिलान्यास हो चुका है। जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 10 जून को भी अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। तीन दिन बाद ही 13 जून को अंडर पास का काम रोक दिया गया। लोगों ने नाराजगी जताई तो प्रशासन ने अंडर पास का काम शुरू करने को रेलवे को पत्र लिखा। चार अक्तूबर को फिर काम शुरू किया गया लेकिन अगले ही दिन फिर काम रुक गया। 13 नवंबर को सांसद ने काम शुरू कराया।
भारी दिक्कत में लोग
अंडरपास न बनने से ओमेक्स सोसायटी के उस पार बसे गांवों, बस्तियों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस स्थान पर रेलवे फाटक न होने से लोगों को आवाजाही में दिक्कत होती है। पटरी के दोनों ओर सड़क बनी है। सड़कों को आपस में जोड़ने के लिए कई वर्षों से लोग अंडरपास बनाने की मांग कर रहे थे। अंडरपास स्वीकृत हुआ तो रेलवे और जनप्रतिनिधि बनवा नहीं पा रहे हैं।
जमीन से लगातार पानी आने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उच्चाधिकारी ही इस मामले में कोई फैसला लेंगे।
-प्रवीन कुमार सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) पूर्वोत्तर रेलवे