क्षेत्र में गेहूं खरीदने के लिए खोले गए सरकारी सेंटरों पर इस बार एक भी दाना गेहूं का नहीं तौला गया है। हालात ये हैं कि इन सेंटरों पर तैनात कर्मचारी भी किसान के गेहूं न लेकर आने से दिन भर सेंटरों से नदारद रह रहे हैं। जिससे ये सेंटर सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं।
मंगलवार को अमर उजाला ने सहकारी गेहूं खरीद केंद्रों का निरीक्षण किया तो सभी सेंटर खाली मिले। एडीओ कोऑपरेटिव नवल किशोर ने बताया कि व्यापारियों द्वारा सरकार के समर्थन मूल्य से अधिक रेट पर गेहूं खरीदा जा रहा है। जिस कारण इस बार क्षेत्र में स्थापित 17 सेंटरों में से किसी भी सेंटर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है। जबकि, सभी सेंटर खुले हैं और गेहूं खरीदने के लिए बारदाना, तौल कांटे उपलब्ध हैं और केंद्र प्रभारियों के साथ ही कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।
प्रत्येक सेंटर पर सात हजार क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। एडीओ किशोर ने बताया कि सहकारिता विभाग के सितारगंज क्रय-विक्रय सहकारी समिति, दक्षिणी किसान सेवा सहकारी समिति का समिति मुख्यालय और कुंवरपुर सिसैया, उत्तरी दीर्घाकार बहुउद्देशीय सहकारी समिति का शुक्लाफार्म व सिसौना, नानकमत्ता दीर्घाकार बहुउद्देशीय सहकारी समिति का मटिहा व खेमपुर, विरिया समिति का नगला, शक्तिफार्म किसान सेवा सहकारी समिति में तौल केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनके अलावा यूसीएफ के बिज्टी, मैनाझुंडी, थारु बघौरी, बिचुवा, मगरसड़ा, बलखेड़ा, लामाखेड़ा, एंजनिया व आरएफसी ने सितारगंज मंडी समिति और नानकमत्ता मंडी समिति में खरीद केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों पर सरकार के एमएसपी 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाना है। लेकिन, व्यापारी 16 सौ से 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रहे हैं।