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लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना : एक ही टरबाइन के लिए उपलब्ध है पानी

Wed, 20 Apr 2016 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो ऊधम सिंह नगर
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 पहाड़ों पर बर्फबारी और बरसात न होने के कारण लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना की एक ही टरबाइन के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है जिससे 12 से 15 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है। गत वर्ष शुरु हुए मशीनों के रिनोवेशन के चलते वैसे भी दो टरबाइनें बंद हैं। जिनमें एक टरबाइन से इसी माह उत्पादन शुरू हो जाएगा जबकि दूसरी मशीन के रिनोवेशन की अवधि अक्तूबर में पूरी हो रही है जिसे जुलाई-अगस्त में शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
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वर्ष 1950 में लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना की नींव रखी गई थी और 1956 में परियोजना की तीन टरबाइनों से 45 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू हुआ था। मशीनों के पुरानी होने से उत्पादन में कमी और मशीनों की समयावधि समाप्त होने पर वर्ष 1979-82 के बीच तीनों टरबाइनों को फौरी तौर पर रिनोवेशन कर उत्पादन बढ़ाया गया था। 2005 के बाद उत्पादन धीरे-धीरे 30 मेगावाट गिर गया।

इसके बाद मशीनों को आधुनिक रूप देने व रिन्यूवेशन पर मंथन हुआ। तीनों टरबाइनों के क्रमबार रिन्यूवेशन का काम 2013 के अंत में शुरू हुआ। वर्तमान में रिन्यूवेशन के बाद टरबाइन नंबर एक से उत्पादन हो रहा है जबकि टरबाइन नंबर दो का रिन्यूवेशन 7 मई को पूरा होना है लेकिन इसी माह के अंत में पूरा हो जाएगा। वहीं तीसरी टरबाइन के रिनोवेशन का काम अक्तूबर में पूरा होना है। सहायक अभियंता दीपक आर्य ने बताया कि वर्तमान में एक मशीन के लिए ही पूरा पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरा पानी मिलने पर 15 और कम मिलने पर 12 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है। 
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मशीनों के रिनोवेशन के बाद बढ़ेगा उत्पादन : डीजीएम
खटीमा। लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना के उप महाप्रबंधक जीएस बुदियाल ने कहा कि तीनों टरबाइनों के रिनोवेशन के बाद पानी उपलब्ध होने पर 42 से 45 मेगावाट तक उत्पादन बढ़ जाएगा जो घटकर करीब 30 मेगावाट रह गया था। उन्होंने कहा कि टरबाइन दो इसी माह चालू हो जाएगी जबकि तीसरी को जुलाई-अगस्त तक शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि बरसात के अंतिम दौर के पानी का उपयोग हो सके।

मशीनों की मियाद होती है 30 साल
खटीमा। उपमहाप्रबंधक बुदियाल ने बताया कि मशीनों की मियाद करीब 30 वर्ष होती है। यह भी बताया कि 1956 में शुरू हुई मशीनों का पहली बार 1979 से 1982 के बीच रिनोवेशन किया गया और अब 2013 से 2016 में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिनोवेशन के बाद मशीनें पूरी तरह से नई हो जाएगी और 30 साल तक काम कर सकती हैं।
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