शहर और ग्रामीण क्षेत्र में झूलते बिजली के तार हादसों को दावत दे रहे हैं। कहीं तार झूल रहे हैं तो कहीं घर से सटकर गुजर रहे हैं। अधिकारी झूलते तारों को लेकर लापरवाह बने हुए हैं। जब कोई हादसा होता है, तभी अधिकारियों की नींद टूटती है। कुछ जगहों पर तारों को ठीक करने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मामला ठंडा होता है तो तारों को कसने का काम से भी हाथ खींच लिया जाता है।
दरअसल विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते हर साल लोग करंट की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। गली मोहल्लों और कालोनियों में हाईटेंशन तार और बिजली के तार ढीले होकर झूल रहे हैं। लेकिन तारों को ठीक करने की जहमत तक नहीं उठाई जा रही है। कई कालोनियों में तो तारों का जाल सा बन गया है। दुर्गा कालोनी में करीब छह साल पहले करंट लगने से दो भाईयों की मौत हो गई थी। लेकिन वहां भी बिजली के तार अभी से घरों से सटकर गुजर रहे हैं। लोगों की शिकायतों पर विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं और हादसा होने पर लोगों का आक्रोश उन्हें झेलना पड़ता है।
ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता विवेक कांडपाल ने बताया कि जिन जगहों का मामला उनके संज्ञान में आ रहा है, वहां लाइन ठीक करवाने के साथ ही खंभे भी बदलवाए जा रहे हैं। कुछ समय में उन्होंने 40 नए खंबे और कई जगहों पर झूलते तारों को ठीक करवाया है। लाइन ठीक करवाने के लिए मुख्यालय से बजट की स्वीकृति लेनी होती है। जहां लाइनें झूलती हुई होने की शिकायत मिलेंगी, वहां उन्हें ठीक कराया जाएगा। झूलती लाइनों को ठीक कराने का काम चल रहा है।
गिरीताल निवासी नितिन शर्मा कहते हैं कि करीब 6 साल पहले कृष्ण प्रणामी मंदिर के पुजारी के दो पोतों की 11 हजार केवी की लाइन को छूने से मौत हो गई थी। वर्तमान में भी लाइन घरों के समीप से होकर गुजर रही हैं। लेकिन विभाग ने अब तक लाइन को शिफ्ट नहीं कराया है। गलियों में तार झूल रहे हैं। लेकिन अधिकारियों को इसकी परवाह नहीं है। संजय शर्मा कहते हैं कि घर के सामने लगा पोल गल चुका है। बरसात होने पर पोल में करंट आता है। घर के सामने ही लाइन लटकर झूल रही है।
विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। कामिनी प्रजापति कहती हैं कि बिजली के झूलते तारों से खतरा बना हुआ है। जिससे कभी भी कोई घटना हो सकती है। विद्युत विभाग की लापवाही से करंट लगने से लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। अधिकारी सब देखकर भी अनदेखा करते रहते हैं। गिरीश चंद्र प्रजापति कहते हैं कि बिजली के झूलते तारों से लोगों और बच्चों को खतरा बना रहता है। बिजली से आए दिन घटनाएं हो रही हैं। विभागीय अधिकारियों का ध्यान झूलते तारों की तरफ नहीं है। हादसा होने के बाद ही उनकी नींद खुलती है।