डौंगपुरी में स्वच्छ जल के प्रयोग को लेकर ग्रामीणों को सांप सीढ़ी के खेल से जागरूक करती स्वजल टीम।
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जिले में पेयजल किल्लत से जूझ रहे छह गांवों के लिए स्वजल विभाग की सोलर पंप आधारित पेयजल योजना की डीपीआर को शासन से मंजूरी मिल गई है। इसके बाद योजना को अमली जामा पहनाने की कसरत भी शुरू कर दी गई है। योजना के धरातल पर उतरने के बाद ग्रामीणों को पाइप लाइन से घरों तक साफ पेयजल मुहैया कराया जाएगा।
दरअसल नीति आयोग ने ऊधमसिंहनगर जिले को देशभर के 115 आकांक्षात्मक जिलों में शामिल किया है। इसी क्रम में स्वजल विभाग ने पेयजल किल्लत वाले रुद्रपुर के बखपुर, नजीमाबाद, गदरपुर के जाफरपुर, सकैनिया, डौंगपुरी और जसपुर के खेड़ा लक्ष्मीपुर के लिए सोलर आधारित पेयजल योजना का खाका तैयार किया था। इन गांवों में पेयजल की किल्लत के साथ ही करीब छह हजार की आबादी पीने के पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भर हैं।
योजना के तहत चयनित गांवों में सोलर पंप के साथ ही 50 मिलीलीटर का टैंक लगाया जाएगा। साथ ही गांवों में घरों तक बिछाई जाने वाली पेयजल लाइनों को पानी की टंकी से जोड़ा जाएगा। बताया कि इस काम में एक गांव के लिए करीब 50 लाख रुपये की लागत आएगी।
मुदाय को योजना में जोड़ते हुए कुल लागत का दस फीसदी उनसे एकत्र किया जाएगा। इसके अलावा योजना के रखरखाव और संचालन का जिम्मा ग्राम पेयजल समिति संभालेगी। स्वजल के परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी ने बताया कि हर गांव में करीब दो से ढाई सौ परिवार रहते हैं। इन गांवों के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी सोलर पंप आधारित पेयजल योजना की डीपीआर को शासन से मंजूरी मिल गई है।
टेस्टिंग में पीने योग्य नहीं मिला पानी
रुद्रपुर। स्वजल की और पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से पेयजल योजना को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। टीम में शामिल मोहित शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों को खुले में शौच से बचने, पानी को उबालकर पीने, रंगोली से गांव का नक्शा, रिसोर्स मैपिंग आदि की जानकारी दी जा रही है। टीम की ओर से पेयजल के नमूने लेकर उनकी रिपोर्ट भी ग्रामीणों से साझा की जा रही है। बताया कि छह गांवों से लिए गए सेंपल में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है।