गूलरभोज। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर न होने से केंद्र सामान्य प्रसव तक सीमित रह गया है। स्थायी डॉक्टर नहीं होने से मरीजों की जांच और इलाज सप्ताह में तीन दिन ही हो रहा है। अस्पताल में स्थायी वार्ड बॉय और सफाईकर्मी की तैनाती तक नहीं है।
अस्सी के दशक में बने पीएचसी में 20 साल से चिकित्साधिकारी का पद रिक्त है। अस्पताल में स्थायी रूप से महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। इस कारण यह अस्पताल सामान्य प्रसव तक ही सिमट कर रह गया है। चिकित्साधिकारी और पुरुष डॉक्टर भी व्यवस्था के तहत सप्ताह में दिन दी ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि महिला डॉक्टर न होने के कारण सामान्य डिलीवरी ही हो पाती है। टिपिकल केस होने पर महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। यहां स्थायी रूप से एक फार्मासिस्ट और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर ही तैनात हैं। अगस्त 2023 से सकैनिया अस्पताल के डॉ. सुधीर गुप्ता सप्ताह में तीन दिन अस्पताल में मरीजों का इलाज करते हैं।
पीएचसी में डॉक्टर की तीन दिनों की मौजूदगी में 70 से 80 मरीजों की तो गैर मौजूदगी में मात्र 25 से 30 मरीजों की ओपीडी ही होती है। अस्पताल में स्थायी पर्यावरण मित्र तक नहीं है। अस्पताल में जच्चा-बच्चा केंद्र है।
यहां एएनएम के दो, लेडी हेल्थ विजिटर (एलएचवी) का एक और स्टाफ नर्स के तीन पद सृजित हैं। वर्तमान में एक एएनएम हैं, वह वर्तमान में मातृत्व अवकाश में है। आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी सेंटर की एएनएम की सेवा ली जाती है। महिला डॉक्टर नहीं होने से केंद्र सामान्य प्रसव तक ही सीमित रह गया है। गंभीर मामलों में गर्भवतियों को रेफर करना पड़ता है।