रुद्रपुर। पर्यावरण को कम से कम प्रदूषित करने के उद्देश्य से सीएनजी वाहनों को प्रोत्साहित करने की कवायद की जा रही है लेकिन यहां वाहन स्वामियों को सीएनजी वाहनों में लगी किट की हाइड्रो टेस्टिंग की सुविधा नहीं मिल पाई है। इसके लिए उन्हें अन्य महानगरों में जाना पड़ता है। परिवहन विभाग के रुद्रपुर संभाग में ही 4851 सीएनजी वाहन पंजीकृत हैं।
गैस अथाॅरिटी ऑफ इंडिया ने सीएनजी वाहनों की हाइड्रो टेस्टिंग अनिवार्य की है। सीएनजी किट की हाइड्रो टेस्टिंग तीन वर्ष में एक बार करानी होती है। ऐसा न करने पर सीएनजी वाहनों को गैस न देने तक का प्रावधान है।
लगातार तीन साल तक सीएनजी भरने से किट कमजोर होने की आशंका रहती है। किट की सील खुलने, टंकी, वाॅल्व खराब होने का खतरा रहता है। सिलिंडर फटने का भी खतरा रहता है लेकिन जिले में सीएनजी वाहनों में लगी किट की हाइड्रो टेस्टिंग के लिए एक भी फिटनेस सेंटर नहीं है। इस वजह से सीएनजी किट फिटनेस की नियमित निगरानी पर भी संशय है।
डेढ़ गुना प्रेशर से मापी जाती है क्षमता
सीएनजी वाहनों की किट की फिटनेस को डाइड्रो टेस्टिंग में सिलिंडर को डेढ़ गुना अधिक प्रेशर से मापा जाता है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से मान्यता प्राप्त एजेंसियां सीएनजी किट जांच का प्रमाणपत्र जारी करती हैं।
संभाग में पंजीकृत सीएनजी वाहन
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में सीएनजी से चलने वाले 1709 व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। सीएनजी और पेट्रोल से चलने वाले व्यावसायिक वाहनों की संख्या 911 है। कार्यालय में पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले 2135 निजी वाहन पंजीकृत हैं। केवल सीएनजी से चलने वाले 96 निजी वाहन पंजीकृत हैं।
कोट
सीएनजी किट की फिटनेस की लगातार निगरानी की जाती है। सीएनजी किट फिटनेस सेंटर की संभावना तलाशी जाएगी। यदि सेंटर के लिए प्रस्ताव आया तो उस पर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने में हरसंभव मदद की जाएगी। - मोहित कोठारी एआरटीओ प्रशासन रुद्रपुर