फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Exclusive: पंतनगर की बेटी निमिषा ने लंदन में विकसित किया एआई प्रोटोटाइप, इस तकनीक का पेटेंट भी फाइल

Thu, 25 Sep 2025 12:29 PM IST
हीरा मेहरा सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद

सार

पंतनगर की बेटी निमिषा कर्नाटक के एआई शोध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाला है। ऑक्सफोर्ड की इस शोधार्थी ने गूगल डीपमाइंड के साथ काम करते हुए छोटे व्यापारियों के लिए ब्रांड-विशेष विज्ञापन बनाने वाला एआई प्रोटोटाइप विकसित किया।
विज्ञापन
निमिषा कर्नाटक, पंतनगर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 

पंतनगर की बेटी व वर्ल्ड बैंक की अंतरराष्ट्रीय सलाहकार और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड (लंदन) की शोधार्थी निमिषा कर्नाटक के शोध ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की दुनिया बदल दी है। उन्होंने गूगल डीपमाइंड (लंदन) के साथ भी काम किया है, जहां उन्होंने छोटे व्यापारियों के लिए एक एआई प्रोटोटाइप विकसित किया जो उन्हें ब्रांड-विशेष विज्ञापन बनाने में मदद करता है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित इस तकनीक का यूएस पेटेंट भी फाइल हो गया है।

 

जीबी पंत कृषि विवि के प्राध्यापक और वर्तमान में जोधपुर व उदयपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. अजीत कर्नाटक की पुत्री निमिषा की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पंतनगर के कैंपस स्कूल से हुई। पंतनगर विवि से कंप्यूटर साइंस में बीटेक में उन्हें एकेडमिक उत्कृष्टता के लिए कुलपति रजत पदक से नवाजा गया। इसके बाद निमिषा आईआईटी से एमटेक कर पीएचडी करने लंदन चली गईं।

 

निमिषा ने बताया कि एआई की दुनिया में जहां हर कोई सबसे बड़े और शक्तिशाली मॉडल बनाने की होड़ में है, वहीं उन्होंने इसके भविष्य की नई तस्वीर पेश की है। उनका मानना है कि एआई की असली ताकत विशाल और सार्वभौमिक मॉडल में नहीं, बल्कि हर क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और जरूरतों के लिए बनाए गए विशेषज्ञ और स्थानीय एआई समाधानों में है। इस शोध का मूल सिद्धांत भी एआई को भरोसेमंद, सबूत-आधारित और अपनी सीमाओं को स्वीकार करने वाला बनाना था। उनका यह शोध सुनिश्चित करता है कि भविष्य की तकनीक इंसानों पर हावी न हो, बल्कि उनकी सबसे बड़ी और भरोसेमंद सहयोगी बने।

वर्ल्ड बैंक में एआई के झूठ पर लगाई लगाम

विज्ञापन

बड़ी संस्थाओं के लिए एआई का सबसे बड़ा खतरा है हैलुसिनेशन (एआई का मनगढ़ंत और झूठी बातें बताना)। जाॅब के तहत निमिषा ने वर्ल्ड बैंक के लिए एवीए-एआई तकनीक पर काम किया। उनकी यह तकनीक बैंक की अपनी रिपोर्ट्स और डेटा पर आधारित है और हर जवाब के साथ सबूत पेश करती है। इससे नीति-विश्लेषकों का काम जोखिम मुक्त हो जाता है।

 

 

 

भारत की आशा कार्यकर्ताओं के लिए ’एआई सहेली’
निमिषा अब इस तकनीक को भारत तक जाने का प्रयास कर रही हैं। वह भारत की कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स (आशा कार्यकर्ता) की मदद के लिए एक मल्टी-एजेंट एआई सिस्टम बना रही हैं। यह एआई एक टीम की तरह काम करेगा और स्वास्थ्य सेविकाओं को मरीजों का रिकॉर्ड रखने और सही स्वास्थ्य सलाह देने में मदद करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें