रुद्रपुर। आनुवंशिक रक्त विकार थैलेसीमिया के मरीजों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मददगार साबित हो रहा है। मिशन के तहत थैलेसीमिया पीड़ितों का इलाज कराया जाता है। आगामी 13 फरवरी को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीआईसी) में थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए लगने वाला वृहद शिविर मरीजों के लिए लाभकारी रहेगा।
जिले में थैलेसीमिया के 173 मरीज हैं। इनमें 98 मेजर तो 75 माइनर थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। थैलेसीमिया के मरीजों को हर दो से तीन हफ्तों में खून चढ़ाकर उनके शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को कम होने से रोका जाता है। थैलेसीमिया के मरीज अक्सर एनीमिया, थकान और अन्य जटिलताओं का अनुभव करते हैं, जिससे उनको दैनिक जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसका इलाज काफी महंगा है।
इस बीमारी में बच्चों के शरीर में खून की कमी होने लगती है। सही समय पर उपचार न मिलने पर मौत तक हो जाती है। ब्लड बैंकों में थैलेसीमिया के रोगियों को हर महीने दो यूनिट रक्त निशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
लाल रक्तकणों की उम्र घट जाती
रुद्रपुर। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, लेकिन थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर मात्र 20 दिनों की हो जाती है। संवाद
थैलेसीमिया के लक्षण
नाक से लगातार खून बहना, मसूड़ों से खून निकलना, त्वचा का आसानी से छिल जाना, जोड़ों में दर्द रहना इस बीमारी के सामान्य लक्षण हैं।
थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए 13 जनवरी डीआईसी में आयोजित शिविर में अपोलो अस्पताल के विशेषज्ञ मरीजों की जांच करेंगे। शिविर मरीजों के लिए बेहद कारगर रहेगा। -़डॉ. हरेंद्र मलिक एसीएमओ/जिला नोडल अधिकारी एनएचएम ऊधमसिंह नगर