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बरा घोटाले में एनएचएआई की भूमिका भी संदिग्ध

Fri, 01 Dec 2017 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
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किच्छा के बरा गांव में एनएच 74 निर्माण के लिए अधिग्रहण किए गए दो खसरों का गलत तरीके से 143 कराने के बाद फोरलेन सड़क का सौदा करने के मामले में सड़क निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था एनएचएआई भी संदेह के घेरे में आ गई है। एसडीएम किच्छा की रिपोर्ट की मानें तो एनएच 74 में फोरलेन निर्माण के लिए एनएचएआई ने प्रारंभिक अधिसूचना प्रस्ताव में खसरा संख्या 520 और 562 का प्रकाशन नहीं कराया था।
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इसका फायदा उठाकर खातेदारों ने भूमि का 143 कराया था।
किच्छा के बरा गांव में एनएच 74 में फोरलेन सड़क बनाने का काम एनएचएआई कर रही है। इसके लिए एनएचएआई ने वर्ष 2013 में गांव के खसरा संख्या 250 और 562 का अधिग्रहण किया था। भूमि का अधिग्रहण करने के बाद एनएचएआई ने फोनलेन निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3 (ए) के तहत प्रारंभिक अधिसूचना का प्रस्ताव तैयार कर सक्षम अधिकारी भूमि अधिग्रहण (काला) के हस्ताक्षर के बाद पांच जुलाई 2013 को प्रकाशन कराया था।

लेकिन उक्त प्रकाशन में खसरा संख्या 250 और 562 का प्रकाशन नहीं किया गया था। एसडीएम की रिपोर्ट के मुताबिक सड़क का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू होकर 2015 तक पूर्ण हो गया था। लेकिन वर्ष 2016 में गांव के किसानों ने तत्कालीन एसएसपी को प्रार्थना पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने एनएच 74 निर्माण नहीं होने की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने, एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ ही एनएचएआई के अधिकारियों पर उनकी अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा रोकने और मुआवजा देने के एवज में 25 से 40 प्रतिशत सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया था।
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मामला प्रशासनिक अधिकारी से संबंधित होने पर एसएसपी ने तत्कालीन डीएम को पत्र भेजकर मामले से अवगत करा दिया था। इसके बाद ना ही प्रशासन ने मामले में कोई कार्रवाई की और ना ही एनएचएआई ने सड़क बिक्री के लिए किये गये दाखिल खारिज को निरस्त करवाने की पहल की। इसके बाद जब किसान मुआवजा नहीं मिलने पर न्यायालय की शरण में गए तो घोटाला उजागर हुआ। डीएम डॉ. नीरज खैरवाल के निर्देश पर एसआईटी को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। हरकत में आई एसआईटी जहां एसएलओ कार्यालय से उक्त खसरों के दस्तावेज ले रही है वहीं चिन्हित लोगों की सीडीआर भी खंगाल रही है। अंदेशा लगाया जा रहा है कि दस्तावेज मिलने के बाद एसआईटी एनएचएआई के साथ ही कुछ तत्कालीन अफसरों को अपनी जांच के दायरे में ले सकती है।



बरा गांव की उक्त जमीन का मामला हाइकोर्ट में विचाराधीन है। फिलहाल इसमें किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं की जा सकती है। यह जांच का विषय है और जांच की जाएगी।
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कर्नल संदीप कार्की, परियोजना निदेशक, एनएचआई
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