पंतनगर। जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 12 साल के अथक परिश्रम से ‘’जौ’’ की नई प्रजाति ‘’यूपीबी-1106 (पंत जौ-1106)’’ विकसित की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह प्रजाति, वर्तमान प्रजाति से 20 फीसदी तक अधिक उपज देने में सक्षम है।
अखिल भारतीय समन्वित गेंहू व जौ परियोजना के तहत आईसीएआर के फसल मानकों की अधिसूचना और किस्मों के विमोचन पर केंद्रीय उप समिति ने पंत विवि से विकसित जौ की इस नई प्रजाति को विमोचित किया। इसके बाद कृषि मंत्रालय ने इसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिसा, पश्चिमी बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के मैदानी इलाके में खेती के लिए अधिसूचना जारी की है।
जौ अपने पोषक तत्वों के लिए सर्वविदित है। यह घुलनशील रेशा, विशेष रूप से बीटा-ग्लूकाॅन से भरपूर एक संपूर्ण अनाज है। वर्तमान में मल्टीग्रेन की लोकप्रियता बढ़ी है, जिसमें जौ एक महत्वपूर्ण अनाज है। इसकी मधुमेह के नियंत्रण में भी अहम भूमिका है। अतः यूपीबी-1106 प्रजाति से जौ के उत्पादन में वृद्धि ही नहीं होगी, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व स्वास्थ्य लाभ में भी वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होंगे।
गेहूं और जौ शोध परियोजना के समन्वयक डाॅ. जेपी जायसवाल ने बताया कि अनाज के लिए पंत जौ-1106 छह पंक्ति वाली उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म है। आईसीएआर के भारतीय गेंहू और जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की ओर से विभिन्न केंद्रों पर आयोजित परीक्षणों में इस प्रजाति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।