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तराई में एनडी ने कांग्रेस के लिए खड़ी की नई मुश्किल

Thu, 19 Jan 2017 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
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एनडी तिवारी का भाजपा में जाना  कांग्रेस के लिए तराई में नई मुश्किल खड़ी कर सकता है। एनडी तिवारी की कर्म स्थली तराई में उनके चाहने वालों की कमी नहीं है। भाजपा ने अगर एनडी तिवारी को प्रचार के लिए उतारा तो कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।


तराई वासी आज भी इस बात को स्वीकारे करते हैं कि ऊधमसिंह नगर का औद्योगिक विकास एनडी तिवारी की देन है। पंतनगर, सितारगंज और काशीपुर में औद्योगिकीकरण से पहले भी तराई में राईस मिलों की स्थापना से लेकर अन्य उद्यमों की स्थापना में भी तिवारी का योगदान स्वीकार किया जा रहा है।
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हाल ही में  दिग्गज नेता यशपाल आर्य ने भाजपा का दामन थाम कर कांग्रेस को झटका दिया था। कांग्रेस इसकी भरपाई कर पाती, इससे पहले ही कांग्रेस को एनडी का झटका भी लगा है। अगर चुनावी माहौल में भाजपा ने एनडी को तराई में प्रचार के लिए उतारा तो विकास की दुहाई देकर तिवारी कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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अपने मुख्यमंत्री काल में एनडी तिवारी ने वर्ष  2005-06 में प्रदेश को चार बड़े सिडकुल पंतनगर, सितारगंज, हरिद्वार और रुड़की के भगवानपुर में रूप में दिए।  सिडकुल एनडी तिवारी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था।
रुद्रपुर और पंतनगर क्षेत्र में एनडी तिवारी ने अपने मुख्यमंत्री  कार्यकाल में वर्ष 2005 यहां पर सबसे पहले दस बड़े उद्योगों को उतारा। इनमें  अशोका लीलैंड, टाटा, बजाज, ब्रिटानिया, पारले, नेश्ले, एचसीएल, एचपी,  महेंद्रा और मिंडा जैसे उद्योग शामिल हैं। पूरे डेढ़ वर्ष के अंतराल में फिर एनडी ने पंतनगर सिडकुल में इन दस कंपनियों के अलावा 490 और कंपनियां स्थापित कराया। इसके बाद उन्होंने सितारगंज में भी सिडकुल की नींव रखी। काशीपुर को एनडी तिवारी पहले ही  अपने केंद्रीय उद्योग मंत्री रहते हुए वहां पर भी सूर्या कंपनी, आईजीएल  सहित कई बड़े उद्योग स्थापित कर दिए थे।
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  एनडी तिवार के कार्यकाल के समय उनकी कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री के पद  पर रहे तिलकराज बेहड़ का कहना है कि पंतनगर सिडकुल को स्थापित करने के लिए  वर्ष 2005 में तिवारी ने रुद्रपुर से लगे पंतनगर क्षेत्र की जमीन को उद्योगों को उपलब्ध कराया। इसमें कई बड़े उद्योगों को स्वीकृति दिए जाने के कागजातों पर भी  उनकी मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए थे। बेहड़ का कहना है कि पंतनगर सिडकुल की स्थापना वर्ष 2005 में हुई और  तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी के कार्यकाल में यहां पर तमाम बड़े उद्योग  स्थापित हुए।
 
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