बिलासपुर निवासी सीरियल बलात्कार के आरोपी सुनील रस्तोगी के जेल जाने के बाद अब उसकी दिव्यांग पत्नी भावना को अपनी बेटियों के भविष्य की चिंता सता रही है। भावना को डर है कि सुनील की दरिंदगी से उसके परिवार पर जो दाग लगा है वह कहीं उसकी बेटियों का भविष्य ना बिगाड़ दे। दूसरी तरफ भावना के बच्चे भी अपने दरिंदे पिता का चेहरा नहीं देखना चाहते। सुनील की करतूत से उसका नाबालिग बड़ा बेटा सदमे में है। पिता की करतूतों की वजह से कर्ज में डूबी अपनी मां को उबारने के लिए वह परिवार से अलग रहने को मजबूर है। वहीं छोटी बेटी भी पिता के शर्मनाक कृत्यों को जानने के बाद मानसिक रुप से अस्वस्थ है।
20 वर्ष पहले जब दिल्ली शशि गार्डन निवासी भावना का विवाह सुनील से हुआ था। सुनील के पांच बच्चे (दो लड़के, तीन लड़कियां) हैं। 10 फरवरी 2016 को रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप में एक बच्ची के साथ रेप के प्रयास की घटना के बाद भावना ने सुनील को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मनमानी करता रहा। अमर उजाला से बातचीत में भावना ने बताया कि उसने छह बार सुनील की जमानत कर्ज लेकर कराई। छोटे बेटे के जन्म के समय उसके दायें पैर में जख्म हो गया और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गई। सुनील ने उसका इलाज सही से नहीं करवाया, जिससे वह दिव्यांग हो गई।
बड़ी बेटी का पढ़ने का मन था। सुनील की लापरवाही से घर में आर्थिक तंगी बनी रही, जिससे वह पढ़ नहीं सकी। चार दिन पहले जब सुनील को पुलिस गिरफ्तार कर ले गई तो भावना ने बिलासपुर के गोपाल विहार में अपनी नंद के घर शरण ली। लेकिन यहां भी वह कितने दिन अपने पांच बच्चों को लेकर रह पायेगी, इसका पता नहीं। सुनील 50 हजार से अधिक का कर्जा कर गया है, जिसे लौटाना भावना के लिए बड़ी चुनौती है। इसके चलते नाबालिग बेटा दिल्ली में मेहनत कर कर्ज को उतारना चाहता है। जब बेटी ने घर की जिम्मेदारी उठानी चाही तो पिता की करतूतों की वजह से कई लोगों ने काम देने से मना कर दिया। बड़ी मुश्किल से बेटी को 700 रुपये में एक घर में झाड़ू पोछा करने का काम मिला है जो परिवार की गुजर बसर के लिए नाकाफी है। पिता की करतूत का पता चलने के बाद छोटी बेटी भी मानसिक रुप से अस्वस्थ हो गई है, और परिवार के लिए चिंता का कारण बन गई है।
सीरियल बलात्कार का आरोपी सुनील की करतूत का पता जब उसके परिवार वालों और रिश्तेदारों को चला तो वह अचंभे में आ गए। परिजनों और रिश्तेदारों की मानें तो सुनील घर और पड़ोस में शांत स्वभाव से रहता था। उसके स्वभाव को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि सुनील इतना बड़ा दरिंदा हो सकता है। घर पर बच्चों को भी वह ठीक से रहने की हिदायत देता था और बेटियों के पहनावे पर भी वह विशेष ध्यान देकर उन्हें टोकता रहता था। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि क्षेत्र की महिलाओं और युवतियों के साथ सुनील द्वारा किसी तरह की गलत हरकतें करने की शिकायत कभी उन्हें नहीं मिली।
आरोपी सुनील की पत्नी भावना ने बताया कि अब तक सुनील ने अपने सिवा परिवार के किसी भी सदस्य का पहचान पत्र नहीं बनवाया। इसके चलते अब जब उसकी बेटी कहीं काम मांगने जाती है तो लोग सत्यापन के लिए पहचान पत्र मांगते हैं जो उसके पास नहीं है। इसके साथ ही सुनील ने कभी राशन कार्ड भी नहीं बनवाया।
आरोपी सुनील का गाजियाबाद में सबसे अधिक आना जाना था। सुनील की जेब से मिले बस और ट्रेन की टिकटों से इस बात की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही वह जिस भी दुकान में काम करता था उसका विजिटिंग कार्ड अपने साथ लेकर घूमता था। दर्जन भर से अधिक कार्ड हमेशा उसके पास रहते थे। कई वकीलों के कार्ड भी उसकी जेब से मिले हैं। लोगों से लिए कर्ज का हिसाब भी वह कागज पर लिखकर अपनी जेब में रखता था।
आरोपी सुनील की पत्नी भावना और बहन ने बताया कि सुनील को टेलरिंग के काम में महारथ हासिल थी। काम का मन होने पर वह एक दिन में सात से आठ पेंटें तैयार कर देता था। लेकिन अक्सर वह काम छोड़कर बिना किसी को बताए गायब हो जाता था। इसके चलते उसे दिल्ली की एक दुकान से निकाला भी गया था। वजह पूछने पर सुनील बताता था कि अक्सर उसके सिर और बदन में दर्द होता है तो उसे याद नहीं रहता कि वह क्या कर रहा है और कहां जा रहा है।
आरोपी सुनील का असली चेहरा सामने आने के बाद अब भावना के मायके और ससुराल पक्ष ने भी उससे किनारा कर लिया है। बातचीत में भावना ने बताया कि जब से सुनील पुलिस की पकड़ में आया है तब से उसके मायके और ससुराल वालों ने उसकी कोई सुध नहीं ली है। मजबूरी में उसने अपनी नंद के घर में आसरा लिया है। तीन महीने बाद नंद की बेटी की शादी होनी है। उसके बाद वह अपने पांच बच्चों को लेकर कहां जाएगी, इसका पता उसे नहीं है।