बेटियां हर क्षेत्र में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं। अल्मोड़ा के छोटे से गांव पहल से निकलकर चतुर्थ श्रेणी कर्मी विशन सिंह कनवाल की बेटी ममता राज्य में ‘उड़नपरी’ के नाम से विख्यात हैं। एथलेटिक्स में वे कई पदक हासिल कर चुकी हैं।
अल्मोड़ा के ग्राम पहल निवासी हीरा देवी कनवाल और न्यायालय में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विशन सिंह कनवाल की चार पुत्रियां और एक पुत्र हैं। उनकी दूसरे नंबर की पुत्री ममता कनवाल रुद्रपुर के सरदार भगत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं।
ममता बचपन से ही एथलेटिक्स में मुकाम हासिल करना चाहती थीं। उसने 1500 मीटर, 3000 मीटर और 5000 मीटर में दौड़ शुरू की। इस बीच ममता ने जिले और राज्य की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी। साथ ही कई पदक हासिल किए। इस बीच उन्होंने अगस्त्यमुनि हास्टल में प्रैक्टिस शुरू की। ममता का गोल्डन सफर 2010 से शुरू हुआ। उन्होंने बंगलूरू में 3000 मीटर में गोल्ड और 500 मीटर में सिल्वर मेडल हासिल किया। नेशनल स्कूल गेम्स अमृतसर पंजाब में 2012 में सिल्वर मेडल हासिल किया।
मध्य प्रदेश के भोपाल में उन्होंने 2011 में 3000 मीटर प्रतियोगिता में सिल्वर हासिल किया। इस समय ममता रुद्रपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि घर में माता-पिता ने कभी खेलने को लेकर रोक-टोक नहीं की। इसी कारण वह राष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स में अपना मुकाम बना सकी। उसने कहा कि भविष्य में अगर महिलाओं के लिए कुछ करने का अवसर मिला तो वह अपना हुनर दूसरी बेटी को सिखाना चाहेंगी।