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नजूल भूमि के मुद्दे पर गरमाई सियासत

Fri, 25 Nov 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
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रुद्रपुर में प्रदेेश सरकार का पुतला फूंकते भाजपाई। - फोटो : अमर उजाला
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 नजूल भूमि से अवैध कब्जे हटाने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में सियासत शुरू हो गई है। भाजपा ने हाईकोर्ट के फैसले को सरकार की लापरवाही का परिणाम बताते हुए शुक्रवार को यहां प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया।  
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 विधायक राजकुमार ठुकराल के नेतृत्व में एकत्र हुए लोगों ने कहा कि रुद्रपुर में सैकड़ों परिवार नजूल भूमि पर निवास कर रहे हैं। लंबे अरसे से मालिकाना हक देने की मांग कर रहे हैं। स्वयं इस मुद्दे को वह कई बार विधानसभा में उठा चुके हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस मामले पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इससे सैकड़ों लोग उजड़ने की कगार पर हैं। ठुकराल ने कहा कि राज्य सरकार ने नजूल भूमि पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक दिलाने की बात न्यायालय में मजबूती से उठाई होती तो आज यह स्थिति नहीं आती।


पुतला फूंकने वालों में धीरेश गुप्ता, तारक सरकार, मोहन लाल श्रीवास्तव, राम सिंह, रिंकू प्रजापति, मंगलसेन गुप्ता, लेखराज प्रजापति, चंद्रपाल, कृष्णपाल गंगवार, राम निवास रस्तोगी, वीरेंद्र सिंह गंगवार, बबलू सिंह, हजारीलाल, दिनेश गुप्ता आदि मौजूद थे।
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नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक दिलाए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को देशज सर्वोदय सांस्कृतिक समिति ने सांकेतिक प्रदर्शन किया। ज्ञापन में कहा गया कि तराई भाबर क्षेत्र में लंबे अरसे से देशज समाज के लोग नजूल भूमि पर रहते हैं, उन्हें मालिकाना हक देने के लिए कई बार प्रयास किया गया लेकिन मालिकाना हक नहीं मिला। नजूल की भूमि पर आवासित लोगों को मालिकाना हक देने के बजाय बेदखल करने के आदेश आ गए हैं।

समिति ने नजूल भूमि पर रह रहे सभी लोगों को मालिकाना हक देने की मांग की। वहां पर कल्याण सिंह, जयंत तिवारी, विजय यादव, अनिल चौहान, ओमपाल सिंह, जमुना प्रसाद, भोला प्रसाद, विष्णु प्रसाद, डीपी तिवारी, राधेश्याम वर्मा, डीएम त्रिपाठी, होरीलाल, सूरजमान सिंह, गजेंद्र सिंह आदि थे।


युवा कांग्रेस नेता सुशील गाबा ने नजूल भूमि खाली कराए जाने के आदेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में नगर के सामने गंभीर संकट आ गया है। इस संकट से उबरने के लिए नगरवासियों को एक होकर यह लड़ाइयां लड़ने की जरूरत है। गावा ने कहा कि मलिन बस्तियों को खाली कराने के लिए हाईकोर्ट के आदेश की समय सीमा के भीतर ही जमीनों का मालिकाना हक दिलाया जाना जरूरी है। इस मामले में शीघ्र ही प्रदेश सरकार से वार्ता की जाएगी।
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