शुक्रवार सुबह 11 बजे विधायक बेहड़ समर्थकों के साथ विकास भवन के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में जलजीवन मिशन के तहत सड़कों की खुदाई की गई और पाइप डालने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं की गई है। इसके चलते लगातार हादसों में ग्रामीण चोटिल हो रहे हैं। कहा कि कईं बार कहने के बावजूद उनकी विधानसभा में जिला योजना से मंजूर सड़कों के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही है। जब तक सड़कों की सूची नहीं मिलेगी, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।
एसडीएम मनीष बिष्ट ने बेहड़ से गुजारिश की लेकिन उन्होंने बात नहीं सुनी। बताया जा रहा है कि सीडीओ धरना देखकर वहां से चले गए। इससे नाराज बेहड़ ने अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी। इसके बाद सीडीओ विशाल मिश्रा, पेयजल निगम की एसई मृदुला सिंह और अन्य अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे। सीडीओ ने कक्ष में चलकर वार्ता करने का अनुरोध किया, जिसे बेहड़ ने ठुकरा दिया। सीडीओ ने लंबे समय तक खोदी सड़कों को ठीक नहीं करने वालों पर कार्यवाही करने की बात कही। काफी देर बाद उन्हाेंने मंजूर सड़काें की सूची बेहड़ को सौंप दी। धरनास्थल पर तय हुआ कि 11 बजे विधायक के साथ उन गांवों का अधिकारी निरीक्षण करेंगे, जहां सड़कें खुदी पड़ी हैं। वहां दर्शन कोली, रमेश तिवारी, बबलू चौधरी, डॉ. गणेश उपाध्याय, मीना शर्मा, गुलशन सिंधी आदि थे।
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पुलिस ने की मनमानी, कमिश्नर ने भी नहीं सुनी
रुद्रपुर। विधायक बेहड़ ने कहा कि किच्छा में एक कार्यकर्ता पर पुलिस ने सत्ता के दबाव में फर्जी गुंडा एक्ट लगा दिया और किच्छा थाना क्षेत्र से बदर कर दिया। कार्यकर्ता का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं था। उन्होंने कमिश्नर से पांच बार फोन किया, लेकिन तारीख पर तारीख मिली। कोई सुनवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट की शरण लेकर गलत की गई कार्रवाई पर रोक लगवानी पड़ी थी। वे समझ नहीं पा रहे कि अफसर इतने बेलगाम क्यों हो गए। संवाद