काशीपुर स्थित कुंडा थाना क्षेत्र के पतरामपुर में पिछले 13 साल से दबी 555 जिंदा मिसाइलों को निष्क्रिय (डिस्पोज) करने की प्रक्रिया पुलिस प्रशासन ने शुरू कर दी है। बुधवार को लखनऊ से पहुंची आर्मी बम डिस्पोजल की टीम ने एसएसपी डा. सदानंद दाते से मुलाकात कर जानकारी ली। बृहस्पतिवार को टीम उस स्थल का निरीक्षण करेगी जहां ये मिसाइलें दफन हैं।
बता दें कि वर्ष 2004 में 10 दिसंबर को विदेश से 16 कंटेनरों में कबाड़ के रूप में काशीपुर शुगर मिल स्थित लोहा गलाने वाली फैक्ट्री में 556 जिंदा मिसाइलें आई थीं। 30 दिसंबर को एक मिसाइल तोड़ते वक्त फैक्ट्री के वेल्डर टांडा उज्जैन निवासी सतपाल की मौत हो गई थी। जांच के बाद पता चला कि 555 अन्य मिसाइलें भी जिंदा हैं, जिनके फटने से काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों को भारी नुकसान हो सकता था। यह देखते हुए सेना के जवानों ने मिसाइल विशेषज्ञों के साथ मिलकर जिंदा मिसाइलों को जमीन में दफना दिया था।
तब से ये मिसाइलें यहीं दबी हुई हैं। अब मिसाइलों को निष्क्रिय करने के लिए पुलिस मुख्यालय से 20 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत होने के बाद पुलिस विभाग ने इस काम के लिए आवश्यक उपकरणों की सूची भी तैयार कर ली है।
बुधवार को लखनऊ से पहुंची भारतीय सेना की बम डिस्पोजल टीम के सूबेदार ने एसएसपी डा. सदानंद दाते से मुलाकत कर जानकारी जुटाई। बृहस्पतिवार को टीम पतरामपुर में दबी मिसाइलों वाले क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपार्ट तैयार करेगी। दिसंबर तक उपकरण खरीदने के बाद जनवरी में मिसाइलों को डिस्पोज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।