ख्ानन क्ष्ाेत्र का मुआयना करती टीम।
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रीवर ट्रेनिंग पॉलिसी के तहत नदियों को चैनलाइज करने के लिए बैगुल, कैलाश नदी में खनन के पट्टे चालू होंगे। इसके लिए बैगुल, सूखी, कैलाश नदी में खनन भूमि का चयन कर पैमाइश की गई। कलक्ट्रेट प्रभारी ने बताया कि पैमाइश की रिपोर्ट डीएम को दी जाएगी। टीम ने साधूनगर में सर्वे किया तो वहां नदी चैनलाइज मिली। इसलिए इस बार वहां खनन नहीं होगा।
डीएम डॉ. नीरज खैरवाल, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने 27 अप्रैल को कैलाश नदी के उकरौली, साधूनगर खनन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने राजस्व, वन, सिंचाई, खनन विभाग को नदी में खनन भूमि की पैमाइश कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। बुधवार को कलक्ट्रेट प्रभारी एमएस नबियाल के नेतृत्व में राजस्व, वन, सिंचाई, खनन विभाग की टीम ने बैगुल, सूखी, कैलाश नदी का निरीक्षण कर खनन भूमि की पैमाइश की।
एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि कलक्ट्रेट प्रभारी नबियाल के नेतृत्व में टीम ने पैमाइश की तो उकरौली में 2700 मीटर तक उपखनिज पाया गया। इस पर दस-दस मीटर की दूरी पर तीन-तीन सौ मीटर के करीब नौ पट्टे आवंटित किए जाएंगे। सिडकुल में संपूर्णानंद जेल के पीछे बैगुल नदी में खनन के लिए चार, सूखी नदी में दो पट्टे दिए जाएंगे। बताया कि साधूनगर में सिंचाई विभाग ने नदी के चैनलाइज होने पर खनन की जरूरत न होने की बात कही।
बताया कि साधूनगर में खनन नहीं होगा। बताया कि पैमाइश की रिपोर्ट डीएम को दी जाएगी। हाइकोर्ट के आदेश के बाद उकरौली, साधूनगर में माहभर से खनन बंद है। वहां तराई पूर्वी वन प्रभाग के एसडीओ आनंद चंद्र आर्य, सिंचाई विभाग के एसडीओ अभय कुमार वर्मा, खनन विभाग के भूवैज्ञानिक प्रदीप कुमार, दिनेश कुमार, पटवारी मुकेश कुमार आदि थे।