सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद की अव्यवस्थाआें का आलम यह है कि धान खरीद शुरू होने के एक माह बाद व्यापारियों ने औने पौने दामों में एक लाख 90 हजार तो सरकारी केंद्रों पर मात्र 14582 क्विंटल धान खरीदा गया है। प्रशासन कितना गंभीर है इस अंदाजा इस बात से लगता है कि एडीओ सहकारिता को लक्ष्य का पता ही नहीं है। इस कारण सहकारिता विभाग एक माह में सिर्फ 14582 क्विंटल धान ही खरीद पाया है जबकि व्यापारियों ने औने-पौने दाम पर 1.90 लाख क्विंटल धान की खरीद लिया है।
सितारगंज तहसील क्षेत्र में एक अक्तूबर को करीब 20 धान क्रय केंद्र खोले गए। इन केंद्रों पर मिलों का आवंटन न होने से 15 दिन तो तौल ही नहीं हुई। किसानों के आंदोलन करने के बाद डीएम ने मिलों का आवंटन किया तो केंद्र चालू किए गए, लेकिन धान की खरीद नहीं हुई। कभी नमी तो कभी मानक से कम का धान बताकर किसानों को टरकाया जा रहा है। कृषि उत्पादन मंडी समिति, सहकारिता विभाग के आंकड़े के अनुसार एक माह के भीतर सभी केंद्रों पर सिर्फ 14582 क्विंटल ही धान खरीदा गया है, जबकि मंडी समिति के आढ़तियों, राइस मिलरों ने 1.90 लाख क्विंटल धान खरीद लिया है।
मंडी समिति में लगे क्रय-विक्रय सहकारी समिति के क्रय केंद्र पर मलपुरी, दड़हा, पंडरी, करघटिया, लौका, नकहा, गोरीखेड़ा के 643 किसानों का करीब 35 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य है लेकिन केंद्र पर सिर्फ 408 क्विंटल धान ही खरीदा गया है। इसी तरह बिचपुरी गांव के केंद्र पर 55 हजार क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष 48 क्विंटल धान की खरीद हुई है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग के केंद्र पर 1372.80 क्विंटल सामान्य, 305.60 क्विंटल ग्रेड ए का धान खरीदा गया है। सहकारिता विभाग के एडीओ बलराज सिंह राज धान खरीद का लक्ष्य नहीं बता सके जबकि, सभी केंद्रों पर किसानों के नाम धान खरीद के लक्ष्य की सूची दी गई है।
2016 के मुकाबले 25 हजार क्विंटल अधिक धान खरीदा
सरकार की ओर से धान का मूल्य 1550 रुपये प्रति क्विंटल सामान्य, 1590 रुपये प्रति क्विंटल ग्रेड ए तय किया गया। किसानों का धान मंडी में 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। पिछले साल अक्तूबर में खरीदे गए 1.65 लाख क्विंटल धान के सापेक्ष इस बार व्यापारियों ने 1.90 लाख क्विंटल धान की खरीद की है। ब्यूरो
खरीद का लक्ष्य एक लाख क्विंटल था
पिछले वर्ष 2015-16 में सितारगंज तहसील क्षेत्र में एक लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष 92999.60 क्विंटल धान की खरीद की गई थी। यह लक्ष्य से कुल सात हजार क्विंटल कम था लेकिन इस बार लक्ष्य की जानकारी सहकारिता, राजस्व विभाग को नहीं है।
सरकार की नीतियों के कारण इस बार किसान बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हैं। हमने खुद अपना धान 1200 रुपये प्रति क्विंटल व्यापारियों को बेचा है जबकि हमारा धान ए ग्रेड का था।
गुरसाहब सिंह गिल, ब्लॉक अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन, सितारगंज
सरकार ने किसानों का धान खरीदने में देरी कर दी है जिस कारण किसानों ने अपना धान व्यापारियों को औने पौने दामों पर बेचा है। अभी भी सरकारी खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुई हैं। जिस कारण किसान को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
त्रिलोचन सिंह, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा