जिला अस्पताल व निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के बीच जलाया गया मेडिकल वेस्ट।
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स्वास्थ्य विभाग ही बायो मेडिकल वेस्ट अधिनियम 1988 की धज्जियां उड़ा रहा है। जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल का मेडिकल वेस्ट परिसर में ही निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के पास फेंका जा रहा है। इतना ही नहीं अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट को जलाया जा रहा है। खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकने और जलाने से एड्स और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
वहीं, शनिवार को मेडिकल वेस्ट के ढेरों पर बच्चा नंगे पैर ही इस कचरे से प्लास्टिक बीनता नजर आया। इधर, प्रभारी क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी नरेश गोस्वामी ने बताया कि खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
इस संबंध में ग्लोबल इनवायरमेंटल सॉल्यूशन कंपनी के एमडी विरेंद्रवीर टूरना कहते हैं कि हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि बगैर मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था के बगैर कोई भी अस्पताल संचालित नहीं हो सकता। इसके बावजूद जिले में सिर्फ जिला अस्पताल व संयुक्त चिकित्सालय काशीपुर का ही एग्रीमेंट व पॉल्यूशन बोर्ड में पंजीकरण है, जबकि करीब 125 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं।
मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए जिला अस्पताल मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के साथ ही एग्रीमेंट व प्रदूषण बोर्ड में पंजीकरण है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मेडिकल वेस्ट को कंपनी के वाहनों से निस्तारण के लिए भेजा जा रहा है।
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डॉ. शैलजा भट्ट, सीएमओ, यूएस नगर।