मेडिकल के छात्र को जब घरवालों ने बाइक खरीद कर नहीं दी तो उसने अपने ही अपहरण की कहानी गढ़ ली। जब परिजनों ने उसके लिए बाइक खरीद उसकी फोटो वाट्सएप पर डाली, तब छात्र घर वापस आया। पुलिस अब छात्र के भविष्य को देखते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है।
मेडिकल कालेज में अध्ययनरत व्यवसायी पुत्र का मेडिकल कालेज में प्रवेश मिलने के बाद परिजनों ने घर पर रखी बाइक यह सोच कर बेच दी कि अब उसे चलाने वाला कोई नहीं है। इधर छात्र मार्च में दो माह के अवकाश पर घर वापस आया तो उसने अपने परिजनों से बाइक बेचे जाने पर नाराजगी जताई और नई बाइक की डिमांड रखी। परिजनों ने कहा कि वह दो माह के लिए आया है फिर बाइक बेकार पड़ी रहेगी इसलिए बाइक खरीदने की क्या आवश्यकता है।
सात मार्च को छात्र अपने दोस्त के घर जाने की बात कहकर घर से निकला तो वापस नहीं आया।
कुछ दिनों बाद उसके मोबाइल से एक लड़की ने फोन कर कहा कि उसका बेटा उसके पास है, अब वह घर नहीं आएगा। छात्र के परिवार वालों ने मामला गंभीर मानते हुए पुलिस को तहरीर सौंपकर पूरी घटना से अवगत कराया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर फोन सर्विलांस पर लगाया तो छात्र की लोकेशन पंजाब के किसी शहर में मिली।
जिस लड़की ने उसके घरवालों को फोन किया वह चंडीगढ़ रहती है। छात्र के फोन से जब बाइक की डिमांड आने लगी तो छात्र के परिजनों व पुलिस ने राहत की सांस ली। छात्र के परिजनों ने जब बाइक खरीदकर उसकी फोटो वाट्स एप पर भेजी, तब जाकर छात्र 17 मार्च को घर लौटा। पुलिस अब छात्र के भविष्य को देखते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है।