रुद्रपुर के ट्रंचिंग ग्राउंड में फैला पड़ा मेडिकल कचरा।
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रुद्रपुर में लोगों की जान खिलवाड़ किया जा रहा है। निजी चिकित्सालयों, पैथोलॉजी लैब का जैव चिकित्सीय कचरे को ट्रंचिंग ग्राउंड के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर भी फेंका जा रहा है। इससे नगर निगम और स्थानीय प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है, जबकि ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान है।
एनजीटी की सख्ती के बावजूद रुद्रपुर में अस्पतालों से निकलने वाले जैव अपशिष्ट खुलेआम फेंके जा रहे हैं। एनएच-74 किनारे स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में जैव अपशिष्ट का ढेर लगा है, लेकिन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को यह समस्या दिखायी नहीं दे रही। निस्तारण के लिए रुद्रपुर में केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, राज्य प्रदूषण बोर्ड व एनजीटी के मानकों के अनुसार स्थापित ग्लोबल इनवायरमेंट सोल्यूशन से सिर्फ 25 अस्पताल व पैथोलॉजी लैब ही जुड़े हैं। ग्लोबल इनवायरमेंट सोल्यूशन इसके एवज में अस्पतालों से प्रतिदिन प्रति बेड 7 रुपये और क्लीनिक से 1680 रुपये मासिक शुल्क लेती है। ऐसे में शेष अस्पतालों का बायोमेडिकल वेस्ट कहां जाता है, यह बड़ा सवाल है। आशंका है कि शेष अस्पताल ग्लोबल को देने के बजाय सफाई कर्मियों की मिलीभगत से कूड़ा कबाड़ियों को बेच रहे हैं।
ग्लोबल इनवायरमेंट सोल्यूशन के एमडी वरिंदर दीप सिंह कहते हैं कि रुद्रपुर में सिर्फ 25 अस्पताल व पैथोलोजी लैब ही ग्लोबल में पंजीकृत हैं, जबकि नियम के अनुसार, पंजीकरण के बगैर किसी अस्पताल का संचालन नहीं हो सकता है। इस लापरवाही से कैंसर, एड्स, पीलिया, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। उधर, इस संबंध में प्रभारी सीएमओ डॉ. मनीष अग्रवाल ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट खुले में नहीं फेंका जा सकता है। अस्पतालों को इसके सुरक्षित निस्तारण के निर्देश हैं।
ट्रंचिंग ग्राउंड और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बायो मेडिकल वेस्ट फेंकने की शिकायतें नहीं मिल रही हैं। खुलेआम बायो मेडिकल वेस्ट फेंके जाने पर 200 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। अगर मेडिकल वेस्ट कोई फेंकता पकड़ा गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जय भारत सिंह,
नगर आयुक्त, रुद्रपुर नगर निगम