काशीपुर में एक घर में लगा मैकेनिकल मीटर।
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पांच साल पहले चली मैकेनिकल मीटर हटाकर डिजिटल मीटर लगाने की ऊर्जा निगम की पहल आज तक पुरी नहीं हो सकी है। ऊर्जा निगम ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी जगहों पर डिजिटल मीटर लगा दिए हैं, लेकिन एक कॉलोनी ऐसी भी है जिसमें 400 घरों में आज तक डिजिटल मीटर नहीं लग सके हैं।
शहर के 400 घरों में आज भी मैकेनिकल मीटर (डिजिटल मीटर) लगे हैं। नगर में करीब सभी जगह डिजिटल मीटर लगाए चुकें है, लेकिन विभागीय अधिकारी लंबे समय से इन घरों से मैकेनिकल मीटर नहीं बदल सके हैं। बता दें कि पहले लोग कर्मचारियों से सेटिंग कर इन मीटरों में आसानी से छेड़छाड़ कर मीटर की रीडिंग को पीछे करा देते थे। इससे बिजली का बिल कम आता था और विभाग को लाखों रुपये का नुकसान होता था। विभाग ने नुकसान से बचने के लिए मैकेनिकल मीटर की जगह डिजिटल मीटर लगाने का निर्णय लिया था। पिछले पांच सालों में अधिकांश मीटर बदले जा चुके हैं।
बताया जा रहा है इन उपभोक्ताओं के मीटर हटाने में विभागीय अधिकारी के आड़े कुछ सत्ताधारी नेता आ जाते हैं। जिसके चलते अधिकारी चुपचाप घरों से लौट जाते हैं। गरीबों के घरों में लगे मैकेनिकल मीटरों को हटाने में अधिकारियों ने देर नहीं की लेकिन इन चार सौ उपभोक्ताओं पर ही अब तक क्यों रियायत बरती जा रही है यह सवाल बना हुआ है। इन मीटरों की जानकारी होने के बावजूद भी अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
शहर में सभी मीटरों को सितंबर तक बदलने का टारगेट दिया गया है। यह कार्य मीटर टेस्टिंग वाले कर रहे हैं। अभी भी नगर के करीब 400 मैकेनिकल मीटर बदले जाने है। इस पर काम चल रहा है।
- विवेक कांडपाल, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड काशीपुर