पहाड़ में मशरूम उत्पादन करने वालों को मशरूम के बीजों के लिए अब भटकना नहीं पड़ेेगा। कृषि विकास केंद्र पिथौरागढ़ में बीज तैयार करने की लैब स्थापित हो चुकी है। लैब में ऑर्डर देने के तीन या चार दिन के भीतर किसानों को बीज उपलब्ध हो सकेगा। अन्य जगहों के किसान भी अपने क्षेत्र के कृषि विकास केंद्र के माध्यम से बीजों का ऑर्डर दे सकते हैं। इसके अलावा कीवी फल के भी पौधे मिल सकेंगे।
पंतनगर विवि में शुक्रवार से शुरू हुए किसान मेले में कृषि विकास केंद्र एंचोली पिथौरागढ़ के स्टॉल पर लोगों को मशरूम के बीजों के बारे में जानकारी दी गई। बताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय में स्थापित लैब में काफी समय से मशरूम के बीज तैयार होते हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को मशरूम की खेती के लिए बीज मंगाने के लिए परेशान होना पड़ता है। केंद्र प्रभारी डॉ. जितेंद्र पात्रा ने बताया कि केवीके पिथौरागढ़ में मशरूम के बीज तैयार करने के लिए लैब स्थापित हो गई है।
यहां मशरूम की मुख्य रूप से दो किस्में बटन और ढिंगरी के बीज तैयार किए जाते हैं। लेकिन, अब चार प्रकार की प्रजातियों के बीज मिल सकेंगे। कहा कि एक किलोग्राम मशरूम का बीज डेढ़ सौ रुपये में मिल जाएगा। कहा कि किसानों के ऑर्डर देने के तीन-चार दिन में बीज उपलब्ध हो जाएगा। लैब स्थापित होने से पहाड़ में मशरूम की खेती को बढ़ावा मिलेगा। बताया कि डेंगू के लिए रामबाण माने जाने वाले कीवी फल के पौधे भी मिल सकेंगे।
आमतौर पर पौधे बाजार में नहीं मिल पाते हैं। ग्राफ्ट तकनीक से कीवी के बीज से दो साल में पौधे तैयार हो पाते हैं। कीवी में विटामिन सी, एस्कार्विक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट भी पाया जाता है। बताया कि एक हजार पौधे की बुकिंग एडवांस आ चुकी है।
चाऊ चाऊ सब्जी ने भी खींचा ध्यान
रुद्रपुर। कृषि मेले में केवीके पिथौरागढ़ के स्टॉल में रखी चाऊ चाऊ सब्जी भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। अमरूद के आकार की सब्जी बेल में लगती है। स्टॉल में मौजूद सब्जी को उगाने वाले किसान ने बताया कि यह अमरूद और लौकी का मिक्स वर्जन है, जो कि नेपाल में बहुतायत में पैदा होती है। इसका स्वाद भी लजीज होता है।
जाड़ों में इसकी बेल सूख जाती है और बरसात होते ही फिर से हरी हो जाती है। सब्जी को जमीन में दबाने से बेल उग जाती है। स्टॉल में आने वाले लोगों ने इसके बीज खरीदने के लिए इच्छा जताई। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने उन्हें बताया कि अगले वर्ष मार्च में होने वाले मेले में चाऊ चाऊ बीज उपलब्ध करा दिया जाएगा।
मशरुम के बीच आसानी से बाजार में नहीं मिल पाते हैं। बीजों को अच्छी लैब में तैयार किया जाता है। पंतनगर विश्वविद्यालय में स्थापित लैब में काफी समय से मशरूम के बीज तैयार होते हैं। लेकिन पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को मशरुम की खेती के लिए बीज मंगाने के लिए परेशान होना पड़ता है। लेकिन