बहन-भाई के अटूट रिश्ते में धर्म के कोई मायने नहीं होते। इतिहास गवाह है कि जब बहन ने आवाज लगाई तो भाई हमेशा रक्षा के लिए दौड़ा चला आया है। उदाहरण के तौर पर मुसीबत में फंसी चित्तौड़ की महारानी कर्णावती ने जब मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी तो उन्होंने तुरंत पहुंचकर उसकी रक्षा की। इतने दशकों के बाद भी भाई-बहन के अटूट प्रेम के त्योहार रक्षाबंधन ने समाज को कौमी एकता के सूत्र में बांधे रखा है। रुद्रपुर के मनीष मणि त्रिपाठी और उनकी मुंह बोली मुस्लिम बहन मुस्कान अंसारी का रिश्ता लोगों के लिए मिसाल बना हुआ है।
सितारगंज के वार्ड संख्या चार निवासी शैली स्कूल में कक्षा छह की छात्रा मुस्कान अंसारी कई सालों से अपने मुंह बोले भाई रुद्रपुर की ग्रीन कालोनी निवासी मनीष मणि त्रिपाठी को राखी बांध रही हैं। मनीष यहां के सिडकुल की पैकेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में क्वालिटी हेड हैं। वे नवंबर 2009 से फैक्ट्री में जॉब कर रहे हैं और तब से चोरगलिया बाईपास पर अपनी मौसी के घर रह रहे हैं। उनका बड़ा भाई आशीष मणि त्रिपाठी गुड़गांव की एस्सेंचर कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पिता गुलाब मणि त्रिपाठी टीडीसी के जीएम पद से सेवानिवृत्त हो हैं और मां आशा त्रिपाठी ग्रहणी हैं। वे बताते है कि उनकी कोई सगी बहन नहीं है। करीब पांच साल पहले सितारगंज में मौसी के घर रहने के दौरान उनकी मुस्कान के परिवार से मुलाकात हुई। मुस्कान के परिवार का मौसी के घर आना-जाना था। हर बार रक्षाबंधन पर उनकी कलाई सूनी रहती थी। यह देख अबोध मुस्कान ने उनको राखी बांध दी। तब से वह उसे बहन मानने लगे और हर रक्षाबंधन पर कहीं भी हों, राखी बंधवाने जरूर पहुंचते हैं। मुस्कान को भी हर रक्षाबंधन पर अपने भाई का बेसब्री से इंतजार रहता है। मनीष ने फोन पर बताया कि वे कई दिनों से कंपनी के काम से हरिद्वार में हैं, लेकिन रक्षाबंधन के कारण रात में सितारगंज लौटेंगे।