पूरी न हुई अयोध्या धाम जाने की आस
हल्द्वानी निवासी भुवन चंद्र जोशी तत्कालीन नगर पालिका हल्द्वानी से 12 साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। किच्छा निवासी ज्योति जोशी बताती हैं कि उनके ताऊ भुवन चंद्र जोशी ने अपने जीवन में साइकिल की ही सवारी की।
पालिका में नौकरी के दौरान वह अपने सभी काम साइकिल से ही करते थे। शनिवार को उन्होंने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन करने की ठानी और बड़े बेटे हिमांशु जोशी से एक हजार रुपये लेकर शाम करीब चार बजे साइकिल से अयोध्या के लिए निकल पड़े।
चार घंटे में 35 किमी का सफर तय कर किच्छा पहुंच गए लेकिन रात के अंधेरे को भांपते हुए उन्होंने रोडवेज बस अड्डे को अपना आशियाना बना लिया। भोर हुई तो छोटे भाई गोपाल से मिलकर अयोध्या जाने लगे। अत्यधिक कोहरा और ठिठुरन को देखते हुए गोपाल ने उन्हें अयोध्या जाने से मना कर दिया। भुवन भी छोटे भाई की बात मान तो गए लेकिन उनके घर न रुक हल्द्वानी अपने घर के लिए लौटने लगे। वह किच्छा से पांच किमी की दूरी ही तय कर पाए थे कि काल बनकर आए अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया।