लालपुर में स्थित महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में दो कर्मचारियों के निलंबन के विरोध में कंपनी के 350 से अधिक कर्मचारी भूख हड़ताल पर चले गए। हड़ताल से कंपनी का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन पर श्रमिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया।
कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन आये दिन श्रमिकों के साथ बदसलूकी करता रहता है। वहीं, कंपनी प्रबंधन ने श्रमिकों की हड़ताल को अवैधानिक करार दिया है। शुक्रवार को प्रबंधन ने दो श्रमिकों को कंपनी से बर्खास्त कर दिया था जिससे श्रमिकों में रोष व्याप्त हो गया और देर रात से ही वह कंपनी परिसर में धरने पर बैठ गए।
श्रमिकों का आरोप था कि प्रबंधन साजिश के तहत श्रमिकों को बाहर कर रहा है। साथ ही कंपनी और श्रमिकों के बीच नए समझौते के लिए टाल मटोल कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन के साथ उनका एग्रीमेंट 2012 में हुआ था जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी है।
प्रबंधन नया एग्रीमेंट करने से मुकर रहा है साथ ही श्रमिकों का शोषण कर रहा है। श्रमिकों का आरोप है कि प्रबंधन मनमाने तरीके से आठ मैन पावर कम कर रहा है जो समझौते के विरुद्ध हैं। कहा कि मांगों को लेकर श्रमिकों ने सहायक श्रमायुक्त से भी मुलाकात की थी और उन्होंने नया एग्रीमेंट होने तक यथावत स्थिति बनाये रखने के लिए कहा था।
बाद में श्रमिकों और प्रबंधन के बीच तीखी नोंक झोंक भी हुई। वहां पर देवेंद्र सिंह, संतोष शुक्ला, पंकज शर्मा, सुनील तिवारी, ज्ञानेंद्र तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, अमित सक्सेना, दर्शन लाल, सुधाकर द्विवेदी, संदीप आदि थे।
कोट
महिंद्रा कंपनी लालपुर में वर्ष 2000 से सुचारु रूप से चल रही है और कंपनी में 356 स्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं । जो सेना यूनियन के सदस्य है। समय-समय पर कंपनी वेतन में बढ़ोतरी व सुविधाओं में सुधार करती रही है । हाल में कुछ कामगारों की एक नई यूनियन महिंद्रा कामगार यूनियन का पंजीकरण हुआ है।
नियमानुसार यह यूनियन पंजीकरण की तिथि से दो साल तक कोई मांग नहीं उठा सकती। कर्मकार यूनियन की मांगे असंवैधानिक है। जिन कर्मचारियों को निकाला गया है वह कार्य के प्रति लापरवाही करते हुए पाए गए और उन्हें मात्र सात दिन के लिए ही सस्पेंड किया गया है।
- अनिल प्रताप सिंह, डीजीएम