एनएच मुआवजा घोटाले मामले में 14 फाइलें गायब करने के आरोप में निलंबित चल रहे एसडीएम के पूर्व पेशकार विकास कुमार चौहान का एक ओर कारनामा सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में मार्केटिंग इंस्पेक्टर की नौकरी पाने वाली महिला के फर्जी स्थायी निवास और पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र बना दिए गए।
इस मामले में पेशकार समेत तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तहसीलदार महेंद्र बिष्ट ने बताया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में मार्केटिंग इंस्पेक्टर के पद पर नौकरी पाने वाली रूबी खातून के स्थायी निवास और पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र की जांच के लिए एसडीएम के आदेश पर टीम गठित की गई थी।
जांच में प्रमाण पत्रों में लगे अभिलेखों में छेड़छाड़ और ओवर राइटिंग पाई गई। ऐसा प्रतीत हुआ कि यह किसी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। फाइलों में लगे कागज और सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ में तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई।
जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम के पेशकार विकास कुमार चौहान, ई-डिस्ट्रिक्ट अधिकारी संजीव कुमार चौहान और पंकज चौहान दोषी पाए गए। एसआई कमलेश भट्ट ने बताया कि तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले की जांच की जा रही है। जांच टीम में राजस्व निरीक्षक छत्रपाल सिंह, भगवान दास गुप्ता, राजस्व उप निरीक्षक सूर्यपाल सिंह, फूल सिंह शामिल थे। विकास कुमार चौहान इस समय रुद्रपुर से अटैच हैं।
हाइकोर्ट से ले आईं स्टे
जसपुर। रूबी खातून खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में तीन साल से तैनात हैं। एक व्यक्ति ने उन पर फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी पाने का आरोप लगाया था। डीएम ने शिकायत को गंभीरता से लेकर एसडीएम को जांच करने को कहा था। रूबी खातून इस मामले में हाइकोर्ट से स्थगन आदेश ले आई। जिसमें उन्होंने गुहार लगाई थी कि जांच पूरी होने और आरोप साबित होने तक उन्हें न तो पद से न हटाया जाए और न ही गिरफ्तार किया जाए।