काशीपुर। 52 शक्तिपीठों में शामिल उज्जैनी शक्तिपीठ मां बाल सुंदरी देवी मंदिर से मां भगवती का डोला सांकेतिक बलि व हवन-पूजन के बाद अर्द्ध रात्रि नगर मंदिर वापस लौट गया। चैती मंदिर से डोला यात्रा देर रात लगभग तीन बजे नगर मंदिर के लिए रवाना हुई, जो लगभग चार बजे नगर पहुंची। इस दौरान मां बाल सुंदरी देवी के जयकारों से काशीपुर गूंज उठा।
ऐतिहासिक चैती मेला चैत्र नवरात्र से पहले 30 मार्च को ध्वजारोहण के साथ शुरू हो गया था। जबकि मां भगवती का डोला चैत्र नवरात्र की सप्तमी की अर्द्ध रात्रि चैती मंदिर स्थित गर्भगृह पहुंचा था। यहां मां भगवती के दर्शनों को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। लगभग सात दिन चैती मंदिर में मां भगवती विराजमान रहने के बाद शनिवार की तड़के नगर स्थित मंदिर में पहुंच गईं। चैती मंदिर में रात 12 बजे से पुरोहित पंडा दयाशंकर जोशी ने धार्मिक अनुष्ठान के साथ मां बाल सुंदरी डोला विदाई की पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान मां भगवती को जायफल व नारियल की बलि दी गई। इसके बाद शुक्रवार रात मंदिर के मुख्य पुजारी पंडा विकास अग्निहोेत्री मां बाल सुंदरी देवी की स्वर्ण मूर्ति को फूलों से सजे डोले में लेकर बैठे। श्रद्धालु मां भगवती के जयकारों के साथ नगर स्थित मंदिर के लिए रवाना हुए। डोला चैती स्थित मां बाल सुंदरी देवी मंदिर से गोविषाण टीले के रास्ते से होते हुए पटेल नगर, महाराणा प्रताप चौक, मुख्य बाजार से होते हुए शनिवार सुबह लगभग चार बजे नगर स्थित मंदिर पहुंचा। पुरोहित पंडित दयाशंकर जोशी ने मंदिर में मां बाल सुंदरी देवी की मूर्ति को धार्मिक अनुष्ठान के साथ पंडा विकास अग्निहोत्री से विराजमान करवाया।
वहां सहायक प्रधान पंडा मनोज अग्निहोत्री, पंडा कृष्ण गोपाल अग्निहोत्री, संदीप अग्निहोत्री, शिवा अग्निहोत्री, शक्ति अग्निहोत्री, विवेक अग्निहोत्री, लक्ष्मण अग्निहोत्री आदि रहे।