प्रदेश सरकार के गन्ना किसानों के भुगतान के प्रति ढुलमुल रवैये के चलते किसान 60 से 70 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाते हुए नगद भुगतान पर गन्ना यूपी को दे रहे हैं। स्थानीय स्तर ही नहीं उच्चाधिकारियों को भी गन्ने की यूपी को जाने वाली सप्लाई की जानकारी है, लेकिन पिछला भुगतान न होने से कोई भी आक्रोशित किसानों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
गन्ने के यूपी जाने का यही सिलसिला रहा तो 15 फरवरी तक गन्ना खत्म हो सकता है।
पिछले वर्ष के गन्ने का भुगतान अब तक नहीं होने से सबसे अधिक खामियाजा उन किसानों को झेलना पड़ रहा है, जो ब्याज पर रुप्ये लेकर अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। ऐसे में किसान घाटे पर ही सही पर नगद भुगतान होने के कारण गन्ना बेच रहे हैं। इसका फायदा भी उठाने वाले कम नहीं हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र सिसैया, मेलाघाट, वगुलिया, खालीमहुवट, नगरा तराई, दमगड़ा सहित जमौर, भगचूरी, हल्दी पचपेड़ा, मझोला, दाह ढाकी, नौसर, बंडिया, जादोपुर, उलानी, सुनपहर सहित विकासखंड के अधिकांश गन्ना बहुल क्षेत्रों से 220 से 235 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना खरीदकर यूपी बार्डर तक ले जाते हैं और फिर ट्रकों से यह गन्ना यूपी की मिलों में चला जाता है। किसानों को पिछले वर्ष का भुगतान नहीं मिल सका है, जबकि वर्तमान पेराई सत्र तीन दिसंबर से शुरू हो चुका है।