उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज गई है। तराई की एक विधानसभा में खुले पार्टी के चुनाव कार्यालय में चाय पानी के खर्च पर दो नेताओं की तकरार हो गई। पढ़िए चुनाव की कहानी...
तराई की एक विधानसभा में खुले पार्टी के चुनाव कार्यालय में चाय पानी के खर्च पर दो नेताओं की तकरार हो गई। खुद को आगामी मेयर मानकर चल रहे नेताजी ने दूसरे नेता को छोटा करार दे दिया। खुद को छोटा कहे जाने से आहत नेताजी ने दर्द सोशल मीडिया पर बयां कर दिया।
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नेताजी ने पार्टी की सदस्यता की रसीद के साथ पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने जिक्र किया कि 26 सालों से पार्टी की सेवा करने के बाद 2012 में पार्टी में आकर खुद को बड़ा समझने वाले नेताजी ने उनको छोटा नेता कह दिया। सवाल उठाया कि पहले आप बताओ कि आप कितने पुराने हो। दूसरे नेता को चुनौती देकर की गई पोस्ट पार्टी में चर्चा का विषय बनी हुई है।
बगावती तेवर में है नेताजी के कार्यकर्ता
अल्मोड़ा संसदीय सीट के एक मैदानी विधानसभा क्षेत्र में एक पार्टी के नेता बगावती मोड पर आ गए हैं। उनका कहना है कि प्रचार-प्रसार करो और हाथ भी कुछ न आए इससे अच्छा है प्रत्याशी से दूरी ही बनाए रखो। काम कुछ करना है नहीं। फिर नेता जी हारे या जीते सुनना तो स्थानीय नेता को ही पड़ता है। चुनाव आते ही सौहार्द और प्रेम उमड़ आता है और पूरे पांच साल तक वे नजर नहीं आते हैं।
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ऐसे में जनता के सामने जाने की हिम्मत नहीं हो रही है। नेताओं का कहना है कि आखिर कब तक एक ही आदमी हाथ जोड़े खड़े दिखाई देगा। पार्टी का फैसला है, तब महानुभाव का सम्मान है। कार्यकर्ताओं का सम्मान तब है जब प्रत्याशी उन्हें पहचाने कि वह उसके लिए कितना जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। अब तो अंतिम बार चुनाव प्रचार है अगली बार से चुनाव के दौरान कहीं दूर चले जाना है।