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संदेह के लाभ ने उम्रकैद से बचा लिया 

Tue, 01 Jan 2019 12:31 AM IST
विपिन कुमार अमर उजाला ब्यूरो  काशीपुर।
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गुजरा साल राकेश गिरि उर्फ संटू की आने वाली जिंदगी को नई सुबह दे गया। काशीपुर में वर्ष 2013 में हुए कमल उर्फ टुल्ला हत्याकांड में निचली अदालत से राकेश को आजीवन कारावास की सजा मिली थी। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और वहां दो सदस्यीय खंडपीठ ने संदेह का लाभ देते हुए राकेश को दोषमुक्त करार दिया है। चार दिसंबर के इस फैसले के बाद 21 दिसंबर को राकेश ने खुली हवा में सांस ली। 
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13 जुलाई 2013 की सुबह करीब छह बजे मोहल्ला लाहोरियान स्थित मां मंशा देवी मंदिर के मुख्य द्वार के पास बोरी में एक युवक का शव बरामद हुआ था। शव की शिनाख्त कमल उर्फ टुल्ला के रूप में हुई थी। मामले में गंगेबाबा रोड निवासी संजीव कुमार शर्मा ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कटोराताल चौकी में धारा 302, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

तत्कालीन चौकी प्रभारी नरेशपाल ने विवेचना करते हुए शव मिलने के अगले दिन ही लाहोरियान निवासी राकेश गिरि उर्फ संटू को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर कमल की हत्या में प्रयुक्त सिलबट्टा बरामद किया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में इसी सिलबट्टे से प्रहार कर कमल उर्फ टुल्ला की हत्या करने की बात कही थी। 20 मई 2017 मुकदमे की सुनवाई कर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने राकेश गिरि को कमल की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। 
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राकेश के अधिवक्ता अभिषेक वर्मा ने एडीजे कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट (याचिका संख्या 148/2017) में चुनौती दी। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी की अदालत में हुई। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया है कि एफएसएल रिपोर्ट में खून लगे सिलबट्टे में खून किसी इनसान का होने की पुष्टि तो हुई थी लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि सिलबट्टे पर मिला खून कमल का ही था। अभियोजन पक्ष यह साबित करने से भी असमर्थ रहा कि कांच के गिलास पर भी आरोपी की अंगुलियों के निशान हैं। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपीलकर्ता राकेश गिरि को संदेह का लाभ देते हुए चार दिसंबर को दोषमुक्त कर दिया। कागजी कार्रवाई के बाद 21 दिसंबर को राकेश को हल्द्वानी जेल से रिहा कर दिया गया। 
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