क्षेत्र के कुछ मेडिकल स्टोरों का लाइसेंस किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से है लेकिन दवा कोई और बेच रहा है। छापेमारी के दौरान इस तरह की खामियां सामने आ रही हैं।
पुलिस के साथ मिलकर दवा विशेषज्ञों की एक टीम ने मंगलवार की देर शाम विभिन्न स्थानों पर छापामार कर एक मेडिकल स्टोर में बिक रही नशे में आने वाली दवाईयां पकड़ी थी।
इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। इधर ड्रग्स इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने भी एक मेडिकल स्टोर पर छापा मारा तो पता चला कि मेडिकल स्टोर का लाइसेंस पिता के नाम से है लेकिन चला उसका बेटा रहा है।
इतना ही नहीं दुकान में कुछ दवाईयों के सैंपल भी बेचे जा रहे थे। जबकि नियमों के तहत सैंपल नहीं बेचे जा सकते है।
ड्रग्स इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि पुलिस के साथ उन्हाेंने जब डाक्टर लाइन में स्थित अग्रवाल मेडिकल स्टोर पर छापा मारा तो वहां दवाईयों के सैंपल बहुत मात्रा में मिले, जो बेचते हुए पाए गए।
जबकि सैंपल बेच नहीं सकते। उन्होंने बताया कि मेडिकल का लाइसेंस पिता के नाम पर है। लेकिन स्टोर चलाते हुए बेटा मिला। बिलों में बेटे के हस्ताक्षर मिले। जबकि बेटा बिलों में हस्ताक्षर नहीं कर सकता है।
सेल खरीददारी का बिल भी नहीं दिखा पाए। उन्होंने बताया कि सात दिन के भीतर सेल खरीददारी के बिल प्रस्तुत करने को कहा गया है। साथ ही स्टोर स्वामी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नहीं देने पर कार्रवाई अमल में लायी जाएगी। कुमार ने बताया कि टांडा उज्जैन स्थित अंश मेडिकल स्टोर का लाइसेंस महिला के नाम पर है। लेकिन दुकान कोई तीसरा व्यक्ति चला रहा था। बताया कि इस कारण मेडिकल स्टोर के लाइसेंस को निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है।