काशीपुर। डेढ़ दशक पूर्व सरकारी अस्पताल में लगाई गई एक्स-रे मशीन की उम्र पूरी हो चुकी है। अब एक्स-रे करने में मशीन की सांस फूलने लगी है। बड़ी मशीन फुंकने से महत्वपूर्ण अंगों के एक्स-रे नहीं हो पा रहे हैं। अब छोटी मशीन से काम चलाया जा रहा है। नई मशीन लगाने के बजाए पुरानी मशीन की ही बार-बार मरम्मत कराई जा रही है।
एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में डेढ़ दशक पूर्व करीब पांच लाख की 300 एमए एक्स-रे मशीन आई थी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में यह मशीन अचानक फुंक गई थी। कुछ समय चलने के बाद तीन दिन से फिर मशीन फुंकी पड़ी है। इससे कमर आदि महत्वपूर्ण अंगों के एक्स-रे बंद हो गए हैं। अब केवल 100 एमए एक्स-रे मशीन से हाथ, पैर और सीने के एक्स-रे हो रहे हैं। मशीन खराब होने से एक्स-रे की संख्या करीब 50 फीसदी घट गई है। इससे अस्पताल के राजस्व में भी गिरावट आ रही है। दोनों मशीनों के चलने से रोज करीब 50 से अधिक एक्स-रे हो रहे थे। दूर दराज से अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों को एक्स-रे कराने की सलाह दी जा रही है। मशीन खराब होने से मरीजों को प्राइवेट में महंगा एक्स-रे कराना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में 110 से 255 रुपये तक एक्स-रे होता है जबकि प्राइवेट में करीब 600 रुपये में एक्स-रे होता है।
10 साल होती है मशीन की समय सीमा
कार्यदायी संस्था केटीपीएल के इंजीनियर निशांत पांडे ने बताया कि पिछले माह एक्स रे मशीन का मदरबोर्ड फुंक गया था। कोली मीटर, डिस्प्ले खराब हो गया था। अब ट्रांसफार्मर फुंक गया है। कांट्रेक्टर की कोइल जल गई है। मरम्मत के बाद मशीन तो बन जाएगी लेकिन बार-बार फुंकती रहेगी क्योंकि यह करीब 17 साल पुरानी है और यहां लोड भी अधिक है। करीब 10 साल मशीन की समय सीमा होती है। नई मशीन लगाने की आवश्यकता है। करीब दो बार में करीब पौने दो लाख खर्च हो चुका है। 300 एमए की मशीन करीब 4-5 लाख में आ जाती है।
सरकारी अस्पताल काशीपुर में एक्स-रे मशीन बार-बार खराब होने की जानकारी मिली है। सीएमएस से जानकारी लेकर नई एक्स-रे मशीन लगवाई जाएगी। -डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, ऊधमसिंह नगर