काशीपुर। डॉक्टरों की लापरवाही से लाखों की लेप्रोस्कोपिक मशीन दो सालों से सरकारी अस्पताल में धूल फांक रही है। इसका लाभ नहीं मिलने से मरीज दूरबीन से ऑपरेशन कराने के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।
मशीन का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है, इस बात का सही जवाब सर्जन, अस्पताल प्रशासन या अन्य किसी के पास भी नहीं है। इसके चलते मरीज को जनरल सर्जरी के लिए सरकारी अस्पताल में लगने वाले 1150 के बजाय निजी अस्पतालों में 20-30 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में यूपी और पर्वतीय क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां बेहतर उपचार के लिए सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में मोटी रकम चुकानी पड़ रही है।
दरअसल, करीब दो वर्ष पूर्व सरकारी अस्पताल में तत्कालीन सर्जन के कार्यकाल में मरीजों को निजी अस्पताल जैसी सुविधा मुहैया कराने के लिए दूरबीन मशीन लगाई गई थी लेकिन इसका लाभ सिर्फ दो मरीजों को मिल सका। इसके बाद विभिन्न कारणों के चलते मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया।
मशीन सिर्फ ओटी में रखी धूल फांक रही है। सरकारी अस्पताल में अभी केवल चीरे वाले ऑपरेशन ही हो रहे हैं। वहीं मशीन के इस्तेमाल न होने के विषय में किसी के पास सही उत्तर नहीं है।