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लालकुआं से अपहृत किशोरी बाबा को चकमा देकर छूटी

Mon, 12 Sep 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गूलरभोज।
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 हैवानियत और इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। लालकुआं से एक बालिका का ढोंगी बाबा ने अपहरण कर लिया। वह उसे बोरे में बंद कर ट्रेन से ले जा रहा था कि किशोरी उसके चंगुल से छूटकर गूलरभोज पहुंच गई। गूलरभोज में भटकती इस मुस्लिम किशोरी को क्षेत्र के हिंदू युवाओं ने मानवता का परिचय देकर सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। किशोरी के परिजनों ने युवकों की प्रशंसा करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया।
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 जानकारी के अनुसार लालकुआं रेलवे स्टेशन के समीप हाथीखाना के पास शनिवार को दस वर्षीय एक मुस्लिम बालिका खेल रही थी। इतने में एक बाबा आया और उसने किशोरी को उसको नशीला पदार्थ सुंघा दिया। मौका पाकर वह उसे एक बड़े बोरे में बंद कर लालकुआं से गूलरभोज जाने वाली गाड़ी में लेकर सवार हो गया। रास्ते में लड़की को होश आया तो वह बाबा को चकमा देकर बोरे से निकल गई। ट्रेन बेरिया हाल्ट पर रुकी तो वह पटरी-पटरी चलते हुए गूलरभोज पहुंच गई।

देर शाम ग्राम कोपा खास ढकानी के कुछ हिंदू युवक रेलवे लाइन पर बैठे थे। रेलवे ट्रैक पर रोती बच्ची को देखकर युवकों ने उससे पूछताछ की। उसने बताया वह लालकुआं रहती है और एक बाबा उसको उठा लाया था। यह सुन सेंचुरी पेपर मिल लालकुआं में काम करने वाले हेमराज ने अपने एक साथी को लालकुआं फोन कर लड़की के बारे में बताया। उक्त युवक ने लड़की के पिता को घटना की जानकारी दी।
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उधर, दिनभर खोजबीन के बाद इकरार पुलिस को सूचना दे रहा था कि गूलरभोज से फोन आ गया। देर रात पिता अपने साथियों के साथ गूलरभोज पहुंच गया। आते ही किशोरी अपने पिता को देखकर लिपट गई और फफक कर रोने लगी। पिता-पुत्री के मिलन पर मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। पिता ने सभी का आभार जताकर युवकों की मानवता की तारीफ की। बच्ची को सुरक्षित उसके पिता को सुपुर्द करने वालों में वासू, नरेंद्र गौड़, जागन सिंह, रमेश कार्की, करन, विशाल ग्रोवर, अमित गुप्ता, हेमराज आदि युवा थे।

 रोती बिलखती बच्ची को देखकर लोगों के जहन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि इतनी छोटी बच्ची का अपहरण किस मकसद से किया जा रहा था। ये तो बच्ची का साहस था कि वह बाबा को चकमा देने मेें कामयाब हो गई।

समाजसेवी विशाल ग्रोवर और नरेंद्र गौड़ ने कहा कि बच्चों के अपहरण के कई केसों में अधिकतर भिखारी और बाबाओं के हाथ होते हैं। पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल इन लोगों की तलाशी लें तो किडनैपिंग पर अंकुश लग सकता है। रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ का थाना है और सुरक्षा बलों का हमेशा पहरा होता है। इसके बावजूद बाबा का दुस्साहस था कि वह लड़की को बोरे में भरकर आराम से ट्रेन में बैठ गया।
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