रुद्रपुर। जिले में पहली बार आयोजित मजदूर-किसान महापंचायत में मजदूरों और किसानों की एकजुटता देखने को मिली। 2000 से भी अधिक किसान और मजदूर पंचायत में पहुंचे। सिडकुल मजदूर किसान जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। सिख संगठनों की ओर से सिडकुल में भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी।
किसान नेताओं के बोल
सिडकुल में स्थानीय लोगों को मिले काम
श्रमिकों का उत्पीड़न कंपनियों में चरम सीमा पर पहुंच गया है। अगर यही स्थिति रही तो उद्योग भी बंद हो जाएंगे। सिडकुल में स्थानीय श्रमिकों को नौकरी में रखना चाहिए। कंपनियों में ठेका प्रथा को बंद कर श्रमिकों को स्थायी रोजगार देना चाहिए।
-जसवंत सिंह, जिला उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन।
अब किसान और मजदूर एक हो गए हैं
255 दिन धरने पर बैठने के बाद भी प्रशासन की ओर से इन्टरार्क श्रमिकों की पीड़ा को नहीं सुना गया। किसान और मजदूर एक हो गए हैं। श्रमिकों की अगर कार्य बहाली नहीं की गई तो फिर किसान और मजदूर एक होकर महापंचायत बैठाएंगे।
-बलजिंदर सिंह मान, किसान नेता।
शोषण होता रहा तो सभी इकाइयों को बंद कर देंगे
सरकार किसानों और मजदूरों का हमेशा से ही शोषण करती आई है। उद्योगों चलाने के लिए मजदूरों का होना भी जरूरी है। अगर इसी तरह शोषण होता रहा तो उग्र आंदोलन करते सभी इकाइयों को बंद कर दिया जाएगा।
-चौधरी अजीत सिंह, किसान नेता, बरेली।
श्रमिकों का गुस्सा
सिडकुल की एक कंपनी में नौकरी करने के बाद मजदूर-किसान महापंचायत को समर्थन देने यहा पहुंचा हूं। देश में महंगाई बढ़ गई है, सरकार पूंजीपतियों का समर्थन कर रही है।
-रामजीत प्रसाद, श्रमिक, सिडकुल।
कंपनी से छूटने के बाद मजदूर-किसान महापंचायत को समर्थन देने पहुंचा है। सरकार किसान और श्रमिकों का शोषण करने में जुटी है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश में भुखमरी और बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंच जाएगी।
-मुनीद यादव, श्रमिक, सिडकुल।
काले कानून लागू कर दिए गए हैं
सिडकुल की कंपनियां श्रमिकों का दमन करती आ रही हैं। इनके खिलाफ धरने में बैठा जाता है। लेकिन शासन प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंगता। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए काले कानून लागू कर दिए गए हैं।
-चंदन सिंह मेवाड़ी, अध्यक्ष, बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन।
मशीनों से काम लिए जाने का विरोध होगा
रुद्रपुर। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने आरोप लगाया कि मजदूरों के बजाय कारखानों, उद्योगों, रेस्टोरेंट, होटल व घरों में रोबोटिक ह्युमनोइड्स से काम लिए जाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है उद्योगों में काम करने वाले एक रोबोट की कीमत दो लाख रुपये होगी। एक रोबोट को खरीदकर उद्योगपति उससे दिन रात काम कराते रहेंगे। उसके बाद उद्योगों को मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इसका विरोध होगा।