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खास खबर: जैविक खेती कर कुंडेश्वरी के कैलाश ने उगाई मुनाफे की फसल, ऑर्गेनिक फार्मिंग कर सालाना लाखों कमा रहे

Sat, 05 Apr 2025 03:07 PM IST
हीरा मेहरा आदर्श सिंह, अमर उजाला

सार

कुंडेश्वरी क्षेत्र में कुमाऊं ब्लॉक के 75 वर्षीय किसान कैलाश मैठानी ने अपने दस एकड़ खेत में ऑर्गेनिक फार्मिंग की है। इससे वह हर साल पांच लाख रुपये से अधिक का मुनाफा कमा रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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जैविक पद्धति से खेती करके किसान अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं। वे खेतों में तैयार तमाम तरह के औषधीय पौधों को इंडस्ट्री को सप्लाई कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी सहयोग कर रहे हैं। कुंडेश्वरी क्षेत्र में कुमाऊं ब्लॉक के 75 वर्षीय किसान कैलाश मैठानी ने अपने दस एकड़ खेत में ऑर्गेनिक फार्मिंग की है। इससे वह हर साल पांच लाख रुपये से अधिक का मुनाफा कमा रहे हैं।

ये औषधीय पौधे उगा रहे

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कैलाश अपने खेतों और बाग में पिपरमिंट, मिंट, कैमोमाइल, लेमन ग्रास, कैलेंडुला, डैमस्क रोज, ग्लैडियोलस आदि को उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि डैमस्क का इस्तेमाल गुलाब जल, गुलकंद व परफ्यूम में किया जाता है। खास बात यह है कि इसे एक बार लगाकर 20-25 साल तक हार्वेस्ट किया जा सकता है। कैलेंडुला के तेल की कीमत 1000 रुपये प्रति किलो है। एक एकड़ में लगाए गए लेमन ग्रास से लगभग 100 किलो तेल निकलता है, एक किलो की कीमत 1200 से 1500 रुपये तक होती है। ग्लैडियोलस की खेती से भी अच्छा मुनाफा होता है।

मेहनत कम और मुनाफा ज्यादा
कृषक कैलाश ने बताया कि पहले वह पारंपरिक खेती करते थे लेकिन उसमें इतनी लागत आती थी कि मुनाफा निकाल पाना मुश्किल होता था। कुछ वर्षों से उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की, जिससे उन्हें मुनाफा मिला और मेहनत भी कम लगी। ऑर्गेनिक फार्मिंग में किसी प्रकार की खाद व दवाइयों का छिड़काव नहीं किया जाता है। इससे काफी खर्च बच जाता है। वह जैविक खेती से तैयार फूल और अन्य चीजों को सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट्स (कैप) को बेचते हैं। एरोमेटिक इंडस्ट्रीज इन चीजों को खरीदती हैं। बताया कि वह ग्रीन टी के लिए कच्चा माल तैयार कर कंपनियों को सप्लाई करते हैं। इसमें गुलाब की पत्तियां, कैमोमाइल, हिबिस्कस, लेमन ग्रास व सहजन की पत्तियों का भी इस्तेमाल किया जाता है।

अगर तीन साल तक लगातार किसान जैविक पद्धति से खेती करते हैं तो खेतों से रासायनिक प्रभाव कम हो जाता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति में भी वृद्धि हो जाती है। सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। ऊधमसिंह नगर में किसान इस तरह की खेती अपनाकर मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही नई तकनीकों के इस्तेमाल से इसे करना और आसान हो जाएगा। -डॉ. अनिल चंद्रा, उद्यान वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, काशीपुर

 

ऑर्गेनिक खेती के लिए मिले ये सम्मान

- एग्रीकल्चर एंड एनवायरनमेंट टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से बेस्ट इंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड 2021

- राज्य औषधीय पादप बोर्ड, उत्तराखंड देहरादून की ओर से औषधीय वनस्पति मित्र पुरस्कार

- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हाॅर्टिकल्चर रिसर्च बेंगलुरु की ओर से हाई टेक फ्लोरीकल्चर अवार्ड

- राज्यपाल ने किसान मेला में किया था प्रगतिशील कृषक सम्मान 2023 से सम्मानित

 

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