परिवार को बेहतर जीवन देने के लिए घर से करीब 75 किमी दूर आया जितेंद्र बाघ के हमले में जिंदगी की जंग हार गया। परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण उस पर जिम्मेदारियां अधिक थीं। मजबूरी में मजदूरी कर वह किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। पीलीभीत से खटीमा के मझोला तक आई उसकी मजबूरी की यात्रा, बाघ के खूनी पंजों के साथ खत्म हो गई। सिर से पिता का साया उठने से चारों बच्चे गुमसुम हैं और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। खनका उछसिया (पीलीभीत) निवासी जितेंद्र सिंह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वह अक्सर मजदूरी करने के लिए मझोला और खटीमा में आता रहता था। इस बार धान की रोपाई के लिए वह अपने गांव के ही नौ साथियों के साथ 13 जून को किसान जसवंत सिंह के यहां काम करने आया था।
उसके साथियों ने बताया कि बुधवार को धान की रोपाई खत्म होने वाली थी। इसके बाद सभी घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। उनके अनुसार यदि जितेंद्र सुबह पानी पीने के लिए नहीं रुकता तो शायद उसकी जान बच जाती। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मचा है। बेटी नेहा (17) व अंशिका (15) और बेटे अनुराग (8) व आयुष (6) का रो-रोकर बुरा हाल है। उसकीू मौत की खबर सुन पत्नी बेसुध हो गई।
अपने शिकार की तलाश में दोबारा लौटा बाघ
पानी की तलाश में आबादी में आने की आशंका
बाघ के पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में आने की आशंका जताई जा रही है। खेत के बगल में एक नाला भी है, जिसमें बाघ छुपा हुआ था। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि बाघ पानी पीने के लिए नाले में आया होगा।
हल्दीघेरा गांव में फिर दिख रहा बाघ
डीएफओ ने ग्रामीणों से अकेले खेतों में न आने की अपील की
डीएफओ हिमांशु बागड़ी ने ग्रामीणों से रोपाई व अन्य कृषि कार्य के लिए अकेले खेतों में न जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेतों में कृषि कार्य करने के लिए किसान व मजदूर समूह में जाएं। शोर भी करते रहें, जिससे वन्यजीव वहां न आ सके। खासकर सुबह-शाम बाघों के आबादी क्षेत्र में आने की अधिक आशंका रहती है।