जसपुर। ईद का चांद दिखाई देने तक मंगलवार से एतकाफ शुरू हो जाएगा। एतकाफ रमजान के आखिरी हिस्से में किया जाता है।
शहर-ए-मुफती शमीम अख्तर सअदी ने एतकाफ (एकांत इबादत) की फजीलत बयान कर उसमें बैठने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मंगलवार से मस्जिदों में एतकाफ शुरू हो जाएगा। महिलाएं भी घर में एतकाफ कर सकती हैं। ईद का चांद दिखाई देने पर ही एतकाफ से उठा जाएगा। रमजान में एतकाफ करने की बड़ी फजीलत है। कुरान में अल्लाह इरशाद फरमाता है कि एतकाफ में बैठने वाले बंदे के जरिये की गई इबादत और दुआ से खुश होकर अल्लाह उस बस्ती से अजाब उठा लेता है और तौबा करने वाले बंदों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। जिस बस्ती में एतकाफ किया गया हो वह बस्ती एक साल तक आफत और परेशानियों से महफूज रहती है।
महिलाओं का एतकाफ
मदों की तर्ज पर महिलाएं भी अपने घर में एतकाफ में बैठ सकती हैं। इसके लिए शर्त है कि जिस जगह पर एतकाफ किया जाए वह जगह पाक साफ हो। बेहतर यही है कि जिस जगह महिलाएं रोजमर्रा पांच वक्त की नमाज अदा करती हों उस जगह पर ही एतकाफ किया जाए।
एतकाफ का वक्त
उलेमाओं ने एतकाफ में बैठने के लिए चांद की 20वीं तारीख यानी मंगलवार की शाम का समय तय किया है। एतकाफ में बैठने वाले सूरज डूबने से पहले एतकाफ में बैठेंगे। नगर एवं देहात क्षेत्र की कमोबेश सभी मस्जिदों में एतकाफ किया जाता है। इस बार भी सभी मस्जिदों में एतकाफ शुरू होने की बात कही जा रही है।
यह हैं एतकाफ की शर्तें
मुफ्ती शमीम अख्तर सअदी ने बताया कि एतकाफ करने की भी कुछ शर्तें हैं। एतकाफ में बैठने वाला मर्द सिर्फ हाजत के समय की मस्जिद से बाहर आएगा। इस बीच किसी से बात नहीं करेगा। हाजत से फारिग होने के बाद सीधे एतकाफ में बैठ कर अल्लाह की इबादत में मशगूल हो जाएगा। नमाज के समय एतकाफ से उठकर नमाज अदा करेंगे।