कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जेल प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जेल में ही 11 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया है। कैदियों की पेशी व मुलाकात पर पूर्णत: रोक लगा दी है। इसके अलावा जेल के प्रशासनिक दफ्तर व बैरकों को दिन में चार बार सैनिटाइज किया जा रहा है।
जेल अधीक्षक दधिराम मौर्या ने बताया कि संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में 45 बंदी हैं और सेंट्रल जेल में करीब 650 कैदी विभिन्न अपराधों में सजा काट रहे हैं। इनमें दोष सिद्ध उम्र कैदी, टर्मिनल व हवालाती कैदी शामिल हैं।
कैदियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जेल के सभी अधिकारी व कर्मचारियों और समस्त कैदियों को मास्क अनिवार्य कर दिए गए हैं। खुली जेल के करीब 22 बंदी झोपड़ियों में रह रहे हैं। अन्य को सेंट्रल जेल में ही रखा गया है।
उन्होंने बताया कि जेल परिसर, दफ्तर व बैरिकों को भी सैनिटाइज किया जाता है। दिन भर में चार बार दवाई का छिड़काव होता है। दरवाजों के लॉक, टेबल व अन्य उपयोगी वस्तुओं की भी ब्लीचिंग की जा रही है।
16 बीमार कैदियों के लिए बनाया अलग बैरक
सितारगंज। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जेल प्रशासन पूरी तरह एहतियात बरत रहा है। जेल में सजा काटने वाले कैदियों में से 16 उम्रदराज व गंभीर रोगों से पीड़ित कैदियों को स्वस्थ कैदियों से अलग कर एक बैरक में रखा गया है। अस्वस्थ व स्वस्थ कैदियों का प्रतिदिन फार्मासिस्ट हेल्थ चेकअप भी कर रहे हैं। संवाद
सितारगंज सेंट्रल जेल के 23 कैदियों को मिलेगा पेरोल
सितारगंज। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर से कम सजा वाले कैदियों को पेरोल या अंतरिम जमानत के आदेश जारी होने के बाद जेल प्रशासन ने सात साल या उससे कम सजा वाले कैदियों को चिन्हित कर लिया है। सेंट्रल जेल में करीब 23 कैदी ऐसे हैं जो सात साल या फिर उससे कम सजा वाले हैं। जेल प्रशासन ने इन कैदियों की सूची तैयार कर कारागार मुख्यालय को भेजी है। इससे इन कैदियों में खुशी का माहौल है।
सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने देश की भीड़ भाड़ वाली जेलों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सात साल या उससे कम सजा वाले कैदियों को पेरोल या अंतरिम जमानत देने के आदेश जारी किए गए। मंगलवार को जेल प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जेल में सात साल या इससे कम सजा में दोष सिद्ध कैदियों को चिन्हित किया।
सेंट्रल जेल में करीब 650 कैदियों में 23 कैदी चिन्हित किए गए। ये कैदी 22 से 50 साल तक की आयु के हैं और उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल व ऊधम सिंह नगर जिलों के निवासी हैं।
ये सभी कैदी साल 2015 से लेकर नवंबर 2019 तक के हैं जो सेेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं। इन कैदियों को अपहरण, पॉक्सो, दुष्कर्म, धोखाधड़ी व दहेज जैसे मामलों में सजा हुई थी। जेल प्रशासन ने चयनित कैदियों की सूची बनाकर कारागार मुख्यालय को भेजी है। इससे इन कैदियों में खुशी का माहौल है। ये कैदी पेरोल या अंतरिम जमानत पर घर जाने के लिए शासन के आदेश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शासन से सात साल या उससे कम सजा वाले कैदियों की सूची मांगी थी जिन्हें चिन्हित कर कारागार मुख्यालय को सूची भेजी है। इन कैदियों को छह सप्ताह के पेरोल या अंतरिम जमानत देने के लिए शासन की उच्च स्तरीय समिति फैसला लेगी। -दधिराम मौर्या, जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल सितारगंज।