रुद्रपुर। पुलिस लाइन में सीज और माल मुकदमे के वाहनों में लगी आग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रथम दृष्टया घटना को हादसा माना जा रहा है लेकिन जिस स्थान पर कई वाहन पुलिस की निगरानी में खड़े थे वहां आग लगना महज संयोग है या लापरवाही, इसकी जांच शुरू हो गई है।
यातायात पुलिस, सीपीयू और पुलिस चेकिंग के दौरान सीज किए गए और माल मुकदमा वाहनों को पुलिस लाइन स्थित खाली मैदान में खड़ा किया जाता है। इनकी निगरानी के लिए हमेशा एक सिपाही की तैनाती रहती है और चहारदीवारी के भीतर किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध होता है। इसके अलावा लंबे समय तक सीज रहने वाले वाहनों से सामान्यतः पेट्रोल और डीजल निकाल लिया जाता है ताकि आग लगने का खतरा कम रहे।
शनिवार को आग लगने की घटना ने सुरक्षा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग कुछ ही मिनटों में तेजी से फैल गई जिससे कई वाहन जल गए। आग लगने का कारण भी स्पष्ट नहीं हैं क्योंकि आसपास ऐसी कोई भी वस्तु नहीं थी जिससे आग लगने की आशंका हो। ऐसे में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर वाहनों में आग कैसे लगी।
आग की घटना को शरारती तत्व से भी जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस लाइन में कर्मियों और अधिकारियों के अलावा किसी की भी एंट्री संभव नहीं है। वहीं, जानकारों का कहना है कि जब कोई वाहन पुलिस अभिरक्षा में होता है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। अगर जांच रिपोर्ट में लापरवाही सामने आती है तो जवाबदेही किसकी होगी? घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि सीज वाहनों की पार्किंग में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
पुलिस फोरेंसिक टीम ने भी शुरू की मामले की जांच
घटना के बाद पुलिस की फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। वहीं अग्निशमन विभाग भी आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि पार्किंग स्थल के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन से निकली चिंगारी या कोई अन्य तकनीकी कारण घटना की वजह हो सकते हैं।
सीटी बजी और बाल्टियां लेकर दौड़ पड़े रंगरूट
आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सैकड़ों रंगरूट घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। अलार्म और सीटी बजते ही रंगरूट पानी से भरी बाल्टियां लेकर आग बुझाने में जुट गए। प्रतिसार निरीक्षक गजेंद्र परवाल भी मौके पर मौजूद रहकर जवानों को निर्देश देते रहे।
माल मुकदमा वाहनों के क्षतिग्रस्त पर क्या कहता है कानून
वरिष्ठ अधिवक्ता कुलवीर ढिल्लो का कहना है कि अगर आग के कारण माल मुकदमा के वाहनों के इंजन नंबर भी जल गए तो जितने भी वाहन चोरी प्रकरण के है, उसमें अभियुक्तों को लाभ मिलेगा और वह सभी बरी हो जाएंगे। इससे बड़ा नुकसान हो सकता है और पुलिस को जवाब देना पड़ेगा।