अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शिक्षा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यशाला में जसपुर के बहादरपुर में भाषायी संस्थान की स्थापना करने, धार्मिक धरोहरों को सहेजने, तथागत बुद्ध के उपदेशों, शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करने का निर्णय लिया गया।
शनिवार की सुबह भारत समेत दूसरे देशों से आए बौद्ध अनुयायियों ने जसपुर के ग्राम बहादरपुर के बौद्ध मठ के दर्शन किए। यहां पर थाईलैंड के संगराजा (राजगुरु) द्वारा भेंट किया गया गौतम बुद्ध का अस्थि कलश रखा गया है। बौद्ध अनुयायियों ने कलश के दर्शन कर प्रार्थना की। इसके बाद सभी बौद्ध भिक्षु ग्राम बज्जरपट्टी स्थित ओशो ध्यान केंद्र पहुंचे। उन्होंने भोजन के बाद केंद्र का अवलोकन किया।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष एल अश्वघोष महाथेरा ने बताया कि कार्यशाला में जसपुर के बहादरपुर में भाषायी संस्थान की स्थापना करने का प्रस्ताव किया गया। इस संस्थान में गेस्ट हाउस, चारदीवारी का निर्माण कार्य चल रहा है। इस संस्थान में संस्कृत, पाली, जापानी, जर्मनी, फ्रेंच, हिंदी, अंग्रेजी समेत 17 भाषाओं का अध्ययन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक ग्रंथों को सहेजने के लिए उनका दोबारा प्रकाशन किया जाएगा। इसके अलावा बुद्ध के सांस्कृतिक, एतिहासिक स्थलों को जापान, थाइलैंड आदि की मदद से विकसित कराने के प्रयास भी किए जाएंगे। व
हां पर ओशो ध्यान केंद्र के प्रमोद शर्मा, सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त एचपी केन, श्रीलंका की डॉ. मालिनी डेयस, बांग्लादेश के ज्ञानदास महाथेरा, रत्ना यशवंत, सुमित केन, धर्मप्रकाश भारतीय, आशुतोष मिश्रा, अरविंद कुमार, डॉ. ओलाक कुमार, डॉ. एम वेलूसामी, डॉ. मनुराजा होडिग, डॉ. कालीचरन, डॉ. शेखर चंद्र जोशी, अजीत सिंह रूपतारा, आईबी सिंह, अरुण अलने, डॉ. अनामिका चौधरी, सुशीला ध्रुव, शीशराव डोंगरे, सुनीता देवी आदि थे।
खुदाई में निकले अवशेषों का प्रदर्शन
बहादरपुर बौद्ध मठ में भगवान बुद्ध की अस्थि कलश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शनिवार को मठाधीश एवं उनके साथ आए विदेशी बौद्ध भिक्षुओं ने बहादरपुर बौद्ध मठ का भ्रमण किया। वर्षों पूर्व मठ के पास खुदाई में निकले मिट्टी के बर्तनों, मूर्ति के अवशेषों को देखा। बौद्ध मठ प्रांगण में बनी बौद्ध भिक्षुओं की समाधियों पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कलश बौद्ध मठ हापुड़ ले जाया जाएगा
बौद्ध मठाधीश महाथेरा ने बताया कि अस्थि कलश बौद्ध मठ हापुड़ ले जाया जाएगा। बहादरपुर बौद्ध मठ में अस्थि कलश के लिए एक मठ का निर्माण कराया जाएगा। मठ का निर्माण होने पर हमेशा के लिए अस्थि कलश मठ में रखा जाएगा। यह अस्थि कलश उन्हें थाइलैंड के राजा संघ घोष ने प्रदान किया है।